हिमालयी राज्यों के लिए अलग विकास नीति बने : निशंक
विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय विकास परिषद की 55वीं बैठक में भाग लेते हुए रमेश पोखरियाल निशंक ने राज्य के लिए स्वीकृत विशेष औद्योगिक पैकेज को वर्ष 2020 तक बढ़ाए जाने की पुरजोर मांग करते हुए कहा कि मूल रूप से वर्ष 2013 तक के लिए स्वीकृत औद्योगिक पैकेज को मार्च 2010 में ही समाप्त कर राज्य के साथ अन्याय किया गया है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में उत्तराखण्ड के योगदान को देखते हुए ग्रीन बोनस के तौर पर पांच हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने, विशेष श्रेणी का राज्य होने के नाते केंद्र पोषित योजनाओं में वित्त पोषण 90:10 के अनुपात में किए जाने तथा टिहरी जल विद्युत परियोजना में 25 फीसदी हिस्सा उत्तर प्रदेश से उत्तराखण्ड को दिलाए जाने का केंद्र से अनुरोध किया।
निशंक ने उत्तराखण्ड में बिजली की समस्या की ओर केंद्र का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राज्य में तापीय विद्युत स्थापना के लिए कोल ब्लॉक व गैस आधारित परियोजनाओं के लिए छह एमएमएससीएमडी गैस का आवंटन किया जाए। साथ ही केंद्रीय कोटे से दो हजार मेगावाट बिजली नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का 65 फीसदी भाग वनाच्छादित है। देश के पर्यावरण व पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण का दबाव राज्य के विकास व संसाधनों पर पड़ रहा है। भैंरोघाटी, जामरानी, किशाऊ, सौंग परियोजनाओं सहित अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं पर्यावरण सबंधी कारणों से रुकी पड़ी हैं। इसलिए राज्य को प्रोत्साहन स्वरूप ग्रीन बोनस के तौर पर पांच हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाएं।
निशंक ने कहा कि उत्तराखण्ड की चीन के साथ 350 किलोमीटर व नेपाल के साथ 275 किलोमीटर सीमा लगती है। भविष्य में सीमापार से माओवादी विचारधारा के लोगों की घुसपैठ की आशंका को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक आर्थिक अवस्थापना सुविधाओं का विकास कर स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाया जाना जरूरी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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