ईरान के खिलाफ ईयू द्वारा कड़े प्रतिबंध संभव
समाचार पत्र 'द डेली टेलीग्राफ' के अनुसार, सोमवार को इसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। ईयू द्वारा प्रस्तावित प्रतिबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा प्रतिबंधों से भी सख्त माने जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन प्रतिबंधों की वजह से कई मुख्य कंपनियों और बैंकों की यूरोपीय बाजार तक पहुंच नहीं हो सकेगी। जर्मनी और इटली के साथ व्यापार में काफी कटौती होगी।
एक यूरोपीय राजनयिक ने कहा, "मेरा मानना है कि इन प्रतिबंधों के विस्तार से ईरान को करारा झटका लगेगा। ये प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र में पारित प्रस्ताव के दायरे से काफी अधिक विस्तृत हैं।"
सभी तरह के निवेश पर पूर्ण मनाही, उपकरणों की बिक्री और रिफाइनिंग व द्रवीय प्राकृतिक गैस उत्पादन में निवेश संबंधी प्रतिबंधों से ईरान का ऊर्जा उद्योग बुरी तरह प्रभावित होगा।
नए बैंकिंग उपायों के तहत ईरान से जुड़े सभी वित्तीय संस्थानों और ईरानी बैंकों को 8,400 पाउंड से अधिक के सभी लेन-देन की पूर्व अधिसूचना और 33,600 पाउंड से अधिक की रकम को स्थानांतरित करने के लिए अधिकार-पत्र प्राप्त करना आवश्यक हो जाएगा।
इसके अलावा यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति जब्ती सूची का विस्तार एक और कड़ा कदम होगा। चालीस से ज्यादा ईरानी कंपनियां और अधिकारी इसके दायरे में हैं। इस सूची का प्रकाशन मंगलवार को किया जाएगा। यूरोपीय संघ में सभी ईरानी मालवाहक विमानों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लग जाएगा।
'दोहरे उपयोग' वाली प्रौद्योगिकी के निर्यात संबंधी प्रतिबंध को परमाणु अनुप्रयोगों से बढ़ाकर सभी पारंपरिक सैन्य अनुप्रयोगों और रासायनिक हथियारों पर लागू कर दिया जाएगा।
माना जा रहा है कि ये कदम जर्मनी, फ्रांस और हालैंड की राजनीतिक इच्छाशक्ति को प्रदर्शित करते हैं। इन देशों के ईरान से व्यापक आर्थिक हित जुड़े हुए हैं।
अमेरिका ने भी ईरान के साथ कारोबार के लिए आर्थिक दंड लागू कर रखा है। अधिकारियों को भरोसा है कि तीसरी दुनिया के देश यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का अनुकरण करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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