हॉलब्रुक ने कहा, आईएसआई और तालिबान के बीच संबंध हैं (लीड-2)
अमेरिका ने स्वीकार किया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और तालिबान के बीच संबंध हैं और इस कारण समस्या उत्पन्न हो सकती है।
भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता में गतिरोध के चंद दिनों बाद ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने उम्मीद जताई कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच संबंध सुधरेंगे।
उन्होंने रेखांकित किया कि वाशिंगटन और इस्लाबाद के बीच रिश्ते से नई दिल्ली के हितों को क्षति नहीं पहुंचेगी।
हॉलब्रुक ने हालांकि अफगानिस्तान में बदलते शक्ति संतुलन में पाकिस्तान की भूमिका को रेखांकित नहीं किया लेकिन भारत द्वारा लंबे समय से कही जा रही इस बात को स्वीकार किया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और तालिबान के बीच संबंध हैं।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "तालिबान और आईएसआई के बीच संबंध एक समस्या है। अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार और सेना से आईएसआई और तालिबान के बीच संबंधों की चर्चा की है।"
हॉलब्रुक ने भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव से मुलाकात की और उन्हें बताया कि पश्चिमी देशों की योजना है कि काबुल के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए तालिबान को एकीकृत किया जाए।
उन्होंने राव को बताया कि ओबामा प्रशासन की रणनीति है कि जुलाई 2011 से पहले अफगानिस्तान में स्थिरता लाई जाए, क्योंकि तब तक उस देश से अमेरिकी सेना को वापस बुला लिया जाएगा।
अफगानिस्तान में स्थिरता के लिए भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए हॉलब्रुक ने भारत और पाकिस्तान को संबंध सुधारने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका के पाकिस्तान से बढ़ते संबंध भारत के हित में हैं।
उन्होंने दक्षिण एशिया में आतंकवादी समूहों के बीच बढ़ते समन्वय की भी चर्चा की। दक्षिण एशिया में आतंकवाद के विषय पर आयोजित सेमिनार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने भी आईएसआई और आतंकवादी समूहों के बीच बढ़ते संबंधों पर चिंता जताई।
लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान समर्थित हक्कानी समूह के बारे में सवाल के जवाब में हॉलब्रुक ने कहा, "इनका दीर्घकालीन उद्देश्य पश्चिमी सभ्यता को नष्ट करना और भारत एवं पाकिस्तान के बीच समस्याएं पैदा करना है।"
आतंकवादी संगठनों से किसी शांति वार्ता की संभावना को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, "लश्कर-ए-तैयबा अलकायदा के समान ही बड़ा खतरा है। अब अलकायदा, तालिबान और लश्कर-ए-तैयबा एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं जैसा कि पहले नहीं था।"
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में स्थिरता लाने में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन वह इस देश के पुननिर्माण में भारत की भूमिका को कम नहीं कर सकता।
अफगानिस्तान में शांति के लिए विवादास्पद प्रस्ताव में तालिबान और पाकिस्तान की बढ़ी हुई भूमिका पर उठाए गए सवाल पर हॉलब्रुक ने कहा, "भारत की भूमिका कम नहीं की जा रही है, यह नंबर गेम नहीं है।"
हॉलब्रुक ने कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान या तालिबान के हाथों में नहीं जा रहा है।
उन्होंने कहा, "आप पाकिस्तान के बिना अफगानिस्तान में स्थिरता नहीं ला सकते और अफगानिस्तान में समस्याओं के समाधान और स्थिरता लाने में भारत की भी बड़ी भूमिका है।"
हॉलब्रुक काबुल में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर भारत आए।
बुधवार रात को उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से अफगानिस्तान में बदलते सत्ता संतुलन के बीच भारत की भूमिका के संबंध में बातचीत की।
अफगानिस्तान के पुनर्गठन और शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका पर भारत की चिंताओं के बाद हॉलब्रुक इस दौरे पर आए हैं।
भारत ने मंगलवार को काबुल सम्मेलन में कहा था कि 'अफगानियों द्वारा, अफगानियों के नेतृत्व में' ही शांति और एकीकरण की प्रक्रिया चलाई जाए और इस कार्य के लिए दुनिया को ज्यादा समावेशी और पारदर्शी होने की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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