सोहराबुद्दीन मामला : शाह शुक्रवार को सीबीआई के सामने पेश होंगे (राउंडअप इंट्रो-1)
शाह को गुरुवार एक बजे तक सीबीआई के समक्ष पेश होने को कहा गया था लेकिन वह एक बजे तक सीबीआई के समक्ष हाजिर नहीं हुए। शाह को भेजे गए दूसरे नोटिस में सीबीआई ने उन्हें शुक्रवार दोपहर एक बजे तक पेश होने का निर्देश दिया है।
शाह की ओर से शाम में जारी एक बयान में कहा गया कि वह अपने निजी काम से बाहर गए हुए थे और जब उन्हें सम्मन की जानकारी मिली, तब उनके लिए निर्धारित समय के भीतर सीबीआई के समक्ष हाजिर होना संभव नहीं था।
उन्होंने कहा, "मैं भाग नहीं रहा हूं। मैं सीबीआई के पास जाऊंगा और उसके सभी सवालों का जवाब दूंगा।"
शाह के वकील महेश जेठमलानी ने भी पुष्टि की है कि वह सीबीआई के समक्ष शुक्रवार को पेश होंगे।
इससे पहले, राज्य सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास ने कहा कि कानून की प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इससे संकेत मिला था कि शाह गुरुवार को ही सीबीआई के समक्ष पेश होंगे।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने उन्हें दूसरा सम्मन भेजते हुए शुक्रवार एक बजे तक पुराना सचिवालय स्थित सीबीआई कार्यालय में पेश होने को कहा है।
मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले शाह को समन करने के लिए सीबीआई पिछले तीन दिनों से प्रयासरत थी। अंत में समन की एक प्रति उनके आवास के बाहर लगा दी गई और दूसरी उनके कार्यालय में भेजी गई।
शाह पर सोहराबुद्दीन की हत्या में शामिल पुलिसकर्मियों को फोन करने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि शेख लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी था। सूत्रों ने कहा कि सीबीआई ने फर्जी मुठभेड़ मामले में मंत्री की भूमिका को साबित करने के लिए फोन रिकार्ड एकत्र किए हैं।
गुजरात के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने सोहराबुद्दीन को 26 नवंबर 2005 को एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया था। उसकी पत्नी कौसर बी तभी से लापता है।
इस वर्ष 12 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने कथित फर्जी मुठभेड़ में शामिल गुजरात और राजस्थान के पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इस संबंध में एक फरवरी को मामला दर्ज किया गया। अब तक इस मामले में 15 पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
शाह को सम्मन भेजे जाने का स्वागत करते हुए सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख ने कहा कि सीबीआई जांच सही दिशा में जा रही है।
रुबाबुद्दीन ने मध्य प्रदेश के उज्जैन से आईएएनएस से फोन पर बातचीत में कहा, "हमें न्याय की उम्मीद है क्योंकि सीबीआई जांच सही दिशा में जा रही है। मैं सीबीआई अधिकारियों के लगातार संपर्क में हूं। देखा जाए क्या होता है।"
उन्होंने कहा, "तुलसी प्रजापति ने राज्य के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को दिए बयान में मेरे भाई की हत्या में शाह की भूमिका के बारे में बताया था लेकिन उन्होंने इसे तव्वजो नहीं दी।" प्रजापति इस मामले में एक प्रमुख गवाह है।
कांग्रेस ने शाह को भेजे गए सम्मन के मद्देनजर उनके इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने नई दिल्ली में कहा, "यह मामला आरोपी, जांच एजेंसी और अदालत के बीच का है। हम बस यह चाहते हैं कि मामले में न्याय मिले।"
उन्होंने कहा, "राज्य में कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे मंत्री को ही कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में सम्मन किया जाना संवैधानिक कठिनाई पैदा करने वाला है।"
तिवारी ने कहा कि कांग्रेस शाह के मंत्री पद पर बने रहने का फैसला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर छोड़ना चाहती है।
इस बीच भाजपा ने बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में चयनित खबरें मीडिया के माध्यम से लीक कराए जाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के राजनीतिक दुरुपयोग पर आवश्यक कदम उठाएगी।
इस मामले में सीबीआई द्वारा गुजरात के गृह राज्यमंत्री अमित शाह को सम्मन भेजे जाने के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पहले की दो जांचों में शाह का नाम नहीं था।
उन्होंने कहा, "क्या कानूनी कार्रवाई करनी है, यह तो शाह को तय करना है लेकिन इस मामले की कुछ सच्चाइयां ये भी हैं कि गुजरात सरकार और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इसकी जांच की थी। इन जांचों में शाह का नाम कहीं नहीं था।"
उन्होंने कहा, "सीबीआई के दुरुपयोग के मामले में भाजपा आवश्यक राजनीतिक कदम उठाएगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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