मध्य प्रदेश में 50 फीसदी विदेशी निवेशकों ने करार से मुंह मोड़ा

कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया है कि वर्ष 2005 में दो, 2007 एवं 2008 में एक-एक विदेश यात्रा मुख्यमंत्री ने की है। इन यात्राओं के दौरान विदेशी कारोबारियों के साथ कुल 20 करारनामों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें से 2005 में 11, 2007 में चार और 2008 में पांच करारनामों पर मध्य प्रदेश सरकार व विदेशी कंपनियों के बीच हस्ताक्षर हुए थे।

उद्योग मंत्री ने बताया है कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच हुईं विदेश यात्राओं पर कुल दो करोड़ चार लाख रुपये खर्च हुए हैं। इस अवधि में जिन कंपनियों ने मध्य प्रदेश में निवेश की रुचि दिखाई और करार किया, उनकी संख्या 20 है। इनमें से नौ ने अब तक क्रियान्वयन ही नहीं किया है, वहीं एक करारनामा करने वाले रुचि नहीं ले रहे हैं।

इतना ही नहीं, कंपनियों के रवैये के कारण एक करारनामे को निरस्त कर दिया गया है। सेंटलुई के विंडसर इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ 2005 में हुए करारनामे पर न केवल अमल पूरा हो गया है, बल्कि उसका मई 2007 में लोकार्पण भी हो चुका है। साथ ही पीथमपुर में स्टील यूनिट के लिए नई दिल्ली की कपारो इंजीनियरिंग इंडिया प्रा. लि. के अंगद पाल ने लंदन में एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। इस इकाई में उत्पादन शुरू हो चुका है।

इसके अलावा तीन कंपनियों के करार का क्रियान्वयन पूरा हो चुका है। तीन अन्य कंपनियों ने सर्वे तो करा लिया है, मगर काम आगे नहीं बढ़ पाया है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने जिन 20 विदेशी कंपनियों के साथ विदेश प्रवास के दौरान करार किए थे, उनमें नौ कंपनियां ऐसी थीं जिन्होंने उस स्थान का खुलासा नहीं किया है जहां वे निवेश करना चाहती हैं। वे सिर्फ मध्य प्रदेश में निवेश के लिए तैयार हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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