ब्रह्मांड के सबसे बड़े तारे की खोज
लंदन, 22 जुलाई (आईएएनएस)। ब्रिटिश अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सूर्य से 320 गुना बड़े ब्रह्मांड के सबसे बड़े तारे की खोज करने का दावा किया है।
यहां शेफील्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 'आर136 एल' नामक इस तारे के बारे में चीली में यूरोपी साउदर्न ऑबजर्वेट्री के एक बहुत बड़े दूरबीन और हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन से आंकड़े इकट्ठा कर पता लगाया।
यह तारा मैगेलैनिक के विशाल बादलों में तरनतुला नेबुला में स्थित है। इससे पहले सबसे बड़े तारे के रूप में 'एडिंगटन लिमिट' की पहचान की गई थी जो सूर्य से करीब 150 गुना बड़ा है।
'एडिंगटन लिमिट' का नाम 1919 में ब्रिटिश भौतिक वैज्ञानिक ऑर्थर एडिंगटन के नाम पर रखा गया। एडिंगटन ने महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत के आधार पर यह साबित किया था कि प्रकाश को गुरुत्वाकर्षण के द्वारा मोड़ा जा सकता है।
विज्ञान के सिद्धांतों के मुताबिक बड़े आकार के तारों में ऊर्जा उत्पन्न होने की दर उन तारों को एकजुट रखने वाले गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में अधिक होता है।
रॉयल एस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी की पत्रिका 'मंथली नोटिस' के ताजा अंक के मुताबिक वर्तमान में 'आर136 ए एल' का आकार सूर्य के 265 गुना है। बूढ़ा होने के साथ यह तारा तेज गति से ऊर्जा उत्पन्न करता है, जिस कारण इसने कुछ करोड़ वर्षो की अवधि में अपना 20 फीसदी भार खो दिया है।
माना जा रहा है कि मूल रूप में यह तारा सूर्य से 320 गुना बड़ा रहा होगा।
तुलनात्मक रूप से देखें तो सूर्य 4.57 अरब वर्ष से चमक रहा है और इसने अपने केवल 0.03 फीसदी भार को ऊर्जा में परिवर्तित किया है।
शेफील्ड की टीम के मुख्य शोधकर्ता और प्रोफेसर पॉल क्रोथर ने 'एस्ट्रोनोमी नाउ' से कहा, "एडिंगटन लिमिट से नजदीक होने के कारण वह तेज गति से अपना भार खो रहा है।"
इसका मतलब यह है कि अपेक्षाकृत ज्यादा गर्म और चमकीला 'आर 136 ए एल' के सतह का तापमान 40 हजार डिग्री सेल्सियस है और यह सूर्य से एक करोड़ गुना ज्यादा चमकीला है।
अब तक ज्ञात तारों में से 'पिस्टन स्टार' और 'एटा कैरिना' भी बड़े तारे हैं। 'पिस्टन स्टार' सूर्य से 80 से 150 गुना बड़ा है जबकि 'एटा कैरिना' करीब 80 गुना है। लेकिन ये तारे नई खोजों के सामने बौना नजर आने लगे हैं।
एस्ट्रोनॉमी नाउ के मुताबिक ओरियन नेबुला में मौजूद सभी तारों की तुलना में 'आर 136 ए एल' ज्यादा ऊर्जा देता है और यदि यह हमारे सौर्यमंडल में होता तो सूर्य से काफी अधिक चमकीला होता और सूर्य चांद की तरह दिखता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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