गर्भाशय कैंसर से बचाते हैं बच्चे!
लंदन, 22 जुलाई (आईएएनएस)। ऐसी महिलाओं में गर्भाशय कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं जिनके या तो कम बच्चे हैं या फिर बच्चे हैं ही नहीं। वर्तमान में प्रतिवर्ष 7,530 महिलाओं में गर्भाशय कैंसर की पुष्टि होती है जबकि 1975 में यह संख्या 4,175 थी।
समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक चिकित्सकों का कहना है कि महिलाओं का अपने करियर में आगे बढ़ने की वजह से बच्चों को जन्म नहीं देना या कम बच्चे पैदा करना गर्भाशय कैंसर के मामले बढ़ने का मुख्य कारण है।
चिकित्सकों ने यह भी कहा कि मोटापे की दर बढ़ने के साथ गर्भाशय में ट्यूमर बनने का खतरा दोगुना हो जाता है।
ब्रिटेन में कैंसर रिसर्च के जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक हर साल गर्भाशय कैंसर से करीब 1,700 महिलाओं की मृत्यु हो जाती है।
खुलासा हुआ है कि अब प्रति 100,000 महिलाओं में से 19 महिलाओं में यह बीमारी विकसित होती है जबकि 1975 में प्रति 100,000 महिलाओं में से 13 को यह बीमारी होती थी। इस तरह गर्भाशय कैंसर की मरीजों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
यह महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे सामान्य कैंसर है और इसकी दर मैगिलनैंट मीलेनोमा (एक प्रकार का त्वचा कैंसर) के अलावा यह अन्य सभी कैंसर की अपेक्षा तेजी से बढ़ रही है।
गर्भाशय कैंसर अक्सर रजोनिवृत्ति के बाद 60 से 69 वर्ष की आयु में होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब महिलाओं के रक्त में इस्ट्रोजन (एक प्रकार का हार्मोन) की मात्रा ज्यादा होती है तब गर्भाशय कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में इस हार्मोन का स्तर कम रहता है। इस प्रकार जो महिलाएं बच्चों को जन्म नहीं देतीं या जिनके कम बच्चे होते हैं वे लंबे समय तक इस हार्मोन की अधिक मात्रा के संपर्क में रहती हैं।
जिन महिलाओं का वजन ज्यादा होता है उनमें भी इसकी संभावना ज्यादा होती है क्योंकि वसा ऊतक अन्य हार्मोनों को इस्ट्रोजन में बदल देते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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