कॉलेजों से समझौते के खिलाफ केरल विधानसभा में बर्हिगमन
कार्यस्थगन प्रस्ताव की मांग करते हुए कांग्रेस विधायक वी. डी. सतीशन ने कहा कि एक छात्र को निजी कॉलेजों में प्रबंधन कोटे के तहत प्रवेश के लिए आवेदन पत्र के लिए 10 लाख रुपये चुकता करना पड़ता है।
उन्होंने कहा, "इन 11 चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रबंधन कोटे की 580 सीटें हैं। भारी-भरकम आवेदन शुल्क के चलते केवल 720 छात्रों ने परीक्षा दी।"
इससे पहले 25 लाख रुपये से ज्यादा का कैपिटेशन शुल्क अदा करने के लिए तैयार कोई भी छात्र प्रवेश परीक्षा में बैठ सकता था।
इस साल से अभ्यर्थी को प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए आवेदन पत्र हेतु 10 लाख रुपये चुकाना पड़ रहा है। इसके बाद यदि वह चयनित होता है तब उसे कैपिटेशन शुल्क जमा करना होगा।
सतीशन ने कहा, "इसका दूसरा सबसे बड़ा दोष यह है कि आवंटन के बाद यदि कोई उम्मीदवार अपनी योग्यता के आधार पर रैंक सूची में ऊपर आ जाता है तो उसे भारी-भरकम अर्थदंड चुकाना होगा। राज्य सरकार और इन कॉलेजों के बीच हुए समझौते का यह एक बड़ा दोष है।"
केरल में कुल 18 चिकित्सा विद्यालय हैं जिनमें 11 निजी और पांच सरकारी हैं। बाकी दो कॉलेज सहकारी क्षेत्र के हैं।
सतीशन ने कहा, "इस दोषपूर्ण समझौते की वजह से केरल के 30,000 से ज्यादा छात्रों ने तमिलनाडु और कर्नाटक के निजी कॉलेजों में प्रवेश परीक्षा दी।"
इस पर शिक्षा मंत्री एम. ए. बॉबी की तरफ से जवाब देते हुए कानून मंत्री एम. विजयकुमार ने कहा कि इससे घबराने का कोई कारण नहीं है क्योंकि प्रवेश की अंतिम तिथि 30 सितंबर तक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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