बिहार विधान सभा में हाथापाई, गालियों की बारिश
बिहार में विकास कार्यो में कथित वित्तीय अनियमितता के मुद्दे पर मंगलवार को विधानसभा के मानसून सत्र में न सिर्फ हंगामा हुआ बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हाथापाई भी हुई और दोनों ओर से कुर्सियां व मेजें तक फेंकी गई। यही नहीं लोगों ने अर्यादित शब्दों का भी प्रयोग किया। इस दौरान कुछ सदस्यों को चोटें भी आईं। हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विधानसभा की कार्यवाही आरंभ होते ही विपक्षी दल के सदस्यों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा आरंभ कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी द्वारा दोनों पक्ष के विधायकों को कई बार समझाने और शांत करने का प्रयास किया गया परंतु जब हंगामा नहीं थमा तो उन्होंने सदन की कार्यवाही दिन में 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे कार्यवाही आरंभ होने के बाद भी हंगामा जारी रहा।
इसके बाद कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी गई। दिन में दो बजे सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो कथित अनियमितता के मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रस्ताव आया, जिस पर चर्चा प्रारंभ हुई। सता पक्ष के सदस्यों ने कथित वित्तीय अनियमितता पर अपना पक्ष रखना शुरू किया तो विपक्षी सदस्य हंगामा करने लगे। इसके बाद पक्ष और विपक्ष के सदस्य आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हुई, जिसमें कम से कम तीन विधायकों को हल्की चोटें भी आई है। इस दौरान कुर्सी और टेबुल भी फेंके गए।
हंगामा देखते हुए अध्यक्ष ने बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी। विधानसभा में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री सहित करीब सभी मंत्री उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि बिहार में विकास कार्यो में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर पटना उच्च न्यायालय द्वारा इसकी जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने के बाद विपक्ष मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है।













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