भारत ने तालिबान के साथ सुलह की लक्ष्मण रेखा याद दिलाई
विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने अफगानिस्तान के भविष्य पर आयोजित काबुल सम्मेलन में कहा, "भारत भी अफगानिस्तान के शांति व सुलह के प्रयासों का समर्थन करता है। लेकिन इस तरह के किसी प्रयास की सफलता के लिए इसे पूरी तरह अफगान केंद्रित और अफगान का होना चाहिए और अफगानिस्तान की आबादी के हर वर्ग को एक साथ लेकर चले।"
कृष्णा ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि इस प्रक्रिया में लंदन सम्मेलन में स्वीकृत लक्ष्मण रेखाओं का पालन किया जाना चाहिए। इनमें हिंसा त्यागना, आतंकवाद से सभी सूत्र काटना और अफगानिस्तान के लोकतांत्रिक व बहुलतावादी मूल्यों वाले संविधान को स्वीकार करना शामिल है।
सम्मेलन में 60 से अधिक देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधि तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठन हिस्सा ले रहे हैं। अफगानिस्तान में 1970 के दशक के बाद अंतर्राष्ट्रीय नेताओं का यह सबसे बड़ा जमावड़ा है।
कृष्णा ने आतंकवाद के साथ निपटने में दोहरे मानदंड के खतरों के प्रति चेताया।
कृष्णा ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आतंकवाद के साथ निपटने में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। आतंकवाद को अलग-अलग नहीं बांटा जा सकता।"
कृष्णा ने आगे कहा, "जैसा कि राष्ट्रपति करजई ने आज कहा, हम एक सामूहिक शत्रु का सामना कर रहे हैं। आज कोई भी व्यक्ति अलकायदा और अन्य आतंकी संगठनों के बीच अंतर नहीं कर सकता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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