मालेगांव विस्फोट के 11 आरोपियों पर मकोका लागू (लीड-2)
मुंबई, 19 जुलाई (आईएएनएस)। बंबई उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार करते हुए 29 सितंबर, 2008 के मालेगांव बम विस्फोट कांड में साध्वी प्रज्ञा सहित सभी 11 आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) हटाए जाने संबंधी आदेश को सोमवार को खारिज कर दिया।
न्यायाधीश बी.एच.मार्लपाले और न्यायाधीश ए.वी.मोहता की खंडपीठ ने आरोपियों पर से मकोका के तहत लगे आरोपों को समाप्त करने के निचली अदालत के 31 जुलाई, 2009 के फैसले को रद्द कर दिया।
उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने वाली राज्य सरकार के इस तर्क को जायज ठहराया कि आतंकवादी मामले के सभी 11 आरोपियों के खिलाफ मकोका को लागू किया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मालेगांव में 29 सितंबर, 2008 को एक मस्जिद के बाहर हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 20 घायल हो गए थे।
इस मामले में साध्वी के अलावा एक सेवारत सैन्य अधिकारी तथा भारतीय सेना के एक पूर्व अधिकारी भी आरोपियों में शामिल हैं।
साध्वी प्रज्ञा के वकील गणेश सोवानी ने आईएएनएस से कहा, "सभी आरोपी राज्य की विभिन्न जेलों में हैं और मकोका के तहत मुकदमे के लिए उन सभी को 23 जुलाई को मुंबई लाया जाएगा।"
आतंक निरोधक दस्ते ने जिन 11 आरोपियों को पकड़ा है, उनमें साध्वी प्रज्ञा चंद्रपाल सिंह ठाकुर उर्फ पूर्णा चेतनानंदागिरि (मुख्य षड्यंत्रकारी), श्यामलाल साहू (भोपाल में मोबाइल की दुकान चलाने वाला), शिवनारायण सिंह कालसांग्रा (इंदौर में इलेक्ट्रिशियन), समीर कुलकर्णी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भोपाल का पूर्व कार्यकर्ता), मेजर रमेश उपाध्याय (अवकाशप्राप्त सैन्य अधिकारी), अजय राहिरकर (अभिनव भारत के कोषाध्यक्ष), राकेश धवाड़े (पुणे में शस्त्र संग्रहकर्ता), जगदीश म्हात्रे (हथियार जुटाने में मददगार), दयानंद पांडेय उर्फ सुधाकर द्विवेदी (मुख्य षड्यंत्रकारी), लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद एस. पुरोहित (सेवारत सैन्य अधिकारी, आरडीएक्स मुहैया कराने वाला) एवं सुधाकर ओ. चतुर्वेदी (हथियार रखने वाला)।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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