'छह सप्ताह पहले ही पकड़ा जा चुका था उल्फा नेता' (लीड-1)
ढाका, 18 जुलाई (आईएएनएस)। युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रमुख उग्रवादी नेता रंजन चौधरी की गिरफ्तारी की घोषणा के एक दिन बाद खबरों में कहा गया कि चौधरी को बांग्लादेश पुलिस ने छह सप्ताह पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। रंजन ने बांग्लादेश में गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना नाम बदलकर मसूद चौधरी रख लिया था।
बांग्लादेश में गिरफ्तारी से बचने के लिए आमतौर पर उग्रवादी नेता यहां की स्थानीय लड़कियों से शादी कर लेते हैं और चौधरी ने भी यहां की एक लड़की से शादी कर ली थी।
चौधरी को शनिवार को मीडिया के समक्ष पेश किया गया था। समाचार पत्र 'न्यू नेशन' के मुताबिक संभवत: यह वही मसूद रंजन चौधरी है जिसे पुलिस ने छह सप्ताह पहले गिरफ्तार किया था। इसे 6 जून को मेमनसिंह कस्बे के रुम्पा अस्पताल से सादा कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने तब गिरफ्तार कर लिया था जब वह घायल होने के बाद यहां भर्ती हुआ था।
समाचार पत्र के मुताबिक पुलिस और पेरा-मिलिट्री रैपिड एक्शन फोर्स बटालियन (आरएबी) ने हालांकि इस संभावना से इंकार किया है लेकिन चौधरी की पत्नी सावित्री संगमा ने इस बात की पुष्टि की है।
सूत्रों का कहना है कि चौधरी ने अपना यह मुस्लिम नाम जनजातीय इलाकों से सुरक्षित बाहर जाने के लिए रखा था।
उल्फा के सैन्य प्रमुख परेश बरुआ के भी बांग्लादेश में होने की संभावना है। बरुआ ने भी एक बांग्लादेशी लड़की से शादी की है।
बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि पिछले दिसंबर के बाद से उल्फा के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद से चौधरी ही यहां से हिंसा की वारदातों का संचालन कर रहा था।
चौधरी उर्फ मेजर रंजन (46), के अलावा उसके बांग्लादेशी सहयोगी प्रदीप मारक (57) को भी उत्तरपूर्वी बांग्लादेश के भैरव जिले में लक्ष्मीपुर गांव से गिरफ्तार किया गया है।
चौधरी धुबरी जिले में उल्फा का महासचिव रह चुका है। आरएबी ने उसके अड्डे से एक पिस्टल, एक रिवाल्वर, चार हाथ से बने बम और बम बनाने की सामग्री बरामद की है।
पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश में उल्फा के प्रमुख अरविंद राजखोवा और राजू बरुआ समेत संगठन के आठ अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की गई थी।
पिछले साल जनवरी में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद से शेख हसीना ने भारत और बांग्लादेश के बीच अपराधों पर नियंत्रण और उग्रवादियों एवं आतंकवादियों पर लगाम कसने के लिए आपसी सहयोग में वृद्धि की है।
डेली स्टार समाचार पत्र के मुताबिक आरएबी के इंटेलीजेंस विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल जियाउल अहसान ने कहा, "बांग्लादेश में अपना ठिकाना बनाकर उल्फा के नेता भारत में अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इन्हीं में से एक इस संगठन का प्रमुख नेता रंजन चौधरी अब जेल में है।"
अहसान ने कहा कि आरएबी देश में इस संगठन के शस्त्रागार का पता लगाने में जुटी है।
आरएवी के प्रमुख मेजर जनरल हसन महमूद खांडेकर ने कहा, "हम यह पता लगा रहे हैं कि यहां उल्फा के संबंध किस उग्रवादी संगठन से हैं और यहां इस संगठन के और कितने नेता छुपे हुए हैं।"
आरएबी के कानूनी और मीडिया विंग के निदेशक कमांडर मोहम्मद सोहेल ने कहा कि चौधरी ने जिनाईघाटी उपजिले के गजनी गांव में 1997 में एक स्थानीय लड़की से शादी की थी वह कई बार भारत जा चुका है। उन्होंने कहा कि वह देश में अवैध रूप से दाखिल हुआ था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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