व्यापार के लिए पूर्वोत्तर में हो रहा आधारभूत ढ़ाचे का विकास
पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों में चीन, म्यांमार, भूटान, बांग्लादेश और नेपाल से जुड़ी 5,000 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है।
वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ए. के. मंगोत्रा ने कहा, "वाणिज्य मंत्रालय के विभिन्न विभाग और संगठन पूर्वोत्तर भारत के सीमावर्ती इलाकों में पड़ोसी देशों के साथ आयात और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न तरीकों से वित्तीय मदद और सुविधाएं देकर आधारभूत संरचनाओं के विकास पर जोर दे रहे हैं।"
पूर्वोत्तर भारत से निर्यात के अवसर के विषय पर आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार केंद्रीकृत सीमा चौकियां (आईसीपी) भी स्थापित कर रही है जिनमें बांग्लादेश सीमा पर अखौरा (त्रिपुरा), दावकी (मेघालय) और करीमगंज (असम) में सीमा चौकियां स्थापित की जा रही हैं।"
यह केंद्रीकृत सीमा चौकियां व्यापारियों और यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं से युक्त होंगी और सुरक्षा जांच, स्वास्थ्य सेवाएं और बैंक जैसी प्रमुख सुविधाओं से लैस होंगी।
एक्जिम बैंक के अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल (2009-10) चार प्रदेशों असम, मेघालय, त्रिपुरा और मणिपुर से 1,394 करोड़ रुपये का निर्यात और यहां 237 करोड़ रुपये का आयात हुआ।
इन प्रदेशों से मुख्यत: चूना पत्थर, चाय और कोयले का निर्यात होता है जबकि सीमेंट, मछली और टाइल्स का आयात होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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