माओवाद पर बनी फिल्म को भारत में मिली हरी झंडी
'सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन' की पुनरीक्षण समिति ने आनंद स्वरूप वर्मा की 125 मिनट की अवधि की वृत्तचित्र फिल्म 'फ्लेम्स ऑफ द स्नो' के सार्वजनिक प्रदर्शन की इजाजत दे दी है।
पिछले महीने भारत में नक्सली हिंसा बढ़ने के बाद बोर्ड ने फिल्म के प्रदर्शन की इजाजत देने से मना कर दिया था। बोर्ड का कहना था, "देश के कुछ हिस्सों में हाल ही में बढ़ी नक्सली हिसा को देखते हुए हिंसा या अतिवाद की किसी भी विचारधारा को औचित्यपूर्ण बताना या उसका बखान करना जनता के हित में नहीं होगा।"
नेपाल की माओवादी राजनीति के नजदीकी माने जाने वाले वर्मा ने इस फैसले को चुनौती दी थी और पिछले सप्ताह बोर्ड की अध्यक्ष शर्मिला टैगोर सहित पुनरीक्षण समिति के छह सदस्यों ने दिल्ली में इस फिल्म को देखा था।
वर्मा ने आईएएनएस से कहा, "अंतत: मैंने यह लड़ाई जीत ली है। फिल्म में बिना किसी काट-छांट के उसके प्रदर्शन के लिए सर्टिफिकेट मिल गया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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