मच्छरों से मुक्ति दिलाएगी सेना की दवा
मच्छर भगाने के पुराने तरीके अब भूल जाइए क्योंकि अब सेना द्वारा खोजी गई एक रामबाण दवा बाजार में आ गई है जिससे बने एक टिश्यू पेपर को शरीर पर फेरने के बाद मच्छर आपके करीब नहीं फटकेंगे।
खास बात यह है कि इस टिश्यू पेपर की कीमत केवल तीन रुपये होगी और यह करीब 36 रुपये की जेल पैकिंग में भी उपलब्ध रहेगी।
मच्छरों से मुक्ति का यह उपाय रक्षा शोध एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने खोजा है और भारतीय सेना पिछले छह साल से इसका उपयोग कर रही है।
इससे भी बड़ी बात यह है कि सेना ने इस दवा के निर्माण के लिए दवाओं के मूल स्रोत यानी एक नया मॉलेक्यूल तैयार किया है जिसका नाम डेथिल पेनिल एसिटामाइड (डीईपीए) रखा गया है। यह मॉलेक्यूल टॉक्सिक यानी जहरीला नहीं होता और इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों में भी किया जा सकता है। ग्वालियर स्थित डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इस मॉलेक्यूल का विकास किया है।
सेना के जवान जिस बेहद सस्ती और उपयोग में आसान दवा को पिछले छह साल से मच्छरों को दूर करने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे, वह अब आम लोगों को भी उपलब्ध हो गई है।
डीआरडीओ ने इस तकनीक के अधिकार इस साल जनवरी में फिक्की के समर्थन से फार्मा कंपनी ज्योति लेबोरेटरीज को दे दिए हैं। यह कंपनी अब मच्छरों से मुक्ति दिलाने वाली इस दवा को बाजार में उतारने जा रही है।
ज्योति लेबोरेटरीज के अध्यक्ष एम. पी. रामचंद्रन ने कहा, "मैं अपने सभी उत्पादों को सबसे पहले अपने राज्य में ही उतारता हूं, इसीलिए मैंने तय किया कि मैं इस मेक्सो-मिलिट्री उत्पाद को जेल और टिश्यू रूप में बाजार में उतारूंगा।"
केरल के स्वास्थ्य मंत्री पी. के. श्रीमाथी ने हाल ही में इस उत्पाद को बाजार में लांच किया था।
इससे पहले भी मच्छर भगाने वाले जेल बाजार में आए हैं जो कुछ घंटों तक ही मच्छरों को दूर रख पाते थे लेकिन डीईपीए तकनीक से लैस उत्पाद लंबे समय तक मच्छरों को आपसे दूर रखेंगे।
डीआरडीओ के एस. राधाकृष्णन ने कहा, "हमारे उत्पाद को भारत के दवा महानियंत्रक ने मंजूरी दी है और इसे सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों में उपयोग किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे मंजूरी दी है।"
राधाकृष्णन ने कहा कि हमने इस मॉलेक्यूल को निजी क्षेत्र को हस्तांतरित कर दिया है, इससे आम नागरिकों को भी इसका पूरा लाभ मिल सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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