सिर्फ 6 दिनों में हुआ था दया याचिका पर फैसला

नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की दया याचिका भले ही बीते चार वर्षो से विचाराधीन हो लेकिन इससे पहले राष्ट्रपति की ओर से एक याचिका पर मात्र छह दिनों के भीतर फैसला आ चुका है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दायर याचिका के जरिए यह बात सामने आई है।

आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने पांच जून को राष्ट्रपति सचिवालय में एक आरटीआई दाखिल की थी। उन्होंने सबसे कम समय में दया याचिका पर हुए फैसले की जानकारी मांगी थी।

इसका जवाब उन्हें नौ जुलाई को मिला। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से बताया गया कि 1996 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने एक दया याचिका पर छह दिनों के भीतर अपना फैसला सुनाया था।

राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से बताया गया, "उपलब्ध रिकार्ड के अनुसार राजस्थान के रहने वाले कैदी रावजी उर्फ राम चंद्र की दया याचिका पर सबसे कम समय में फैसला हुआ था। उसकी दया याचिका राष्ट्रपति सचिवालय के पास 13 मार्च, 1996 को भेजी गई थी। इसे 19 मार्च, 1996 को खारिज कर दिया गया था।"

रावजी अपनी पत्नी और तीन बच्चों की हत्या का दोषी था। उसने अपनी मां और पड़ोसी की पत्नी की भी हत्या करने का प्रयास किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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