रातोंरात टूटा ग्रीनलैंड ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा
इसके टूटने से जितनी बर्फ का नुकसान हुआ वह न्यूयार्क के मैनहट्टन द्वीप के आठवें हिस्से के बराबर थी।
ग्लेशियर का जो हिस्सा समुद्र को छूता था वह एक ही दिन के अंदर करीब 1.5 किलोमीटर तक पीछे चला गया था। ग्लेशियर का इतनी दूरी तक पीछे जाना अब तक कभी नहीं हुआ था।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ग्रीनलैंड से जिस बर्फ का नुकसान हुआ है उसमें से 10 प्रतिशत बर्फ जैकोबशॉन की थी।
नासा के एक वक्तव्य में कहा गया है कि इस ग्लेशियर को उत्तरी गोलार्ध के समुद्री जल स्तर में वृद्धि का विशेष कारण माना जाता है।
ओहियो स्टेट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इयान होवेट और मिन्निसोटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक पॉल मोरिन ग्रीनलैंड की बर्फ की चादरों में होने वाले बदलावों के लिए उसकी उपग्रह तस्वीरों का अध्ययन कर रहे थे।
इस सप्ताह ग्लेशियर से बर्फ की चादर टूटने की घटना असामान्य नहीं थी, होवेट ने कुछ घंटों में ही इसका पता लगा लिया था।
नासा मुख्यालय में वैज्ञानिक थॉमस वैगनर कहते हैं कि समुद्रों में तापमान बढ़ने के चलते ग्रीनलैंड और अंटाकर्टिक में बर्फ की चादरें टूट रही हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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