औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर गिरकर 11.5 फीसदी हुई (लीड-1)
अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 17.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, इसे बाद में संशोधित करके 16.5 प्रतिशत किया गया।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के अनुसार समीक्षाधीन माह में विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार की गति 12.3 प्रतिशत रही, जो अप्रैल माह के दौरान 19.3 प्रतिशत थी।
केंद्रीय वित्त सचिव अशोक चावला ने संवाददाताओं से कहा कि किसी को भी यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि विनिर्माण क्षेत्र लगातार लंबे समय तक ऊंची वृद्धि दर कायम रखेगा। इसमें कई बाधाएं हैं।
ऊर्जा उत्पादन में 6.4 फीसदी और खनन क्षेत्र में 8.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में सामान्य सूचकांक में 14.1 फीसदी की तेजी देखी गई जबकि इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र में 15.1 फीसदी का इजाफा हुआ। अप्रैल-मई में खनन और बिजली सूचकांक में क्रमश: 10.2 फीसदी और 6.6 फीसदी की वृद्धि देखी गई।
चावला ने कहा कि अर्थव्यवस्था जहां उत्पादन की कमी थी उसे दूर किया गया और अब विनिर्माण क्षेत्र सामान्य वृद्धि दर प्रदर्शित कर रहा है जो अर्थव्यवस्था के लिए बढ़िया होगी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव अमित मित्रा ने कहा, "विनिर्माण क्षेत्र पर कम आधार का प्रभाव धीरे-धीरे घटेगा और जून में भी विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि घटने की संभावना है। पूंजीगत वस्तुओं में तेज वृद्धि के पीछे भी पिछले वर्ष की नकारात्मक वृद्धि है।"
महंगाई पर लगाम लगाने के उद्देश्य से बाजार से तरलता सोखने के लिए 27 जुलाई को होने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा से पहले इस महीने के शुरू में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लघु अवधि के लिए दिए जाने वाले कर्ज के ब्याज पर 0.25 फीसदी का इजाफा कर दिया है। इन नतीजों पर हालांकि आरबीआई के इस निर्णय का फर्क नहीं पड़ा है।
मौद्रिक नीतियों को सख्त बनाने के लिए इस साल तीसरी बार आरबीआई ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इस माह की शुरुआत से पहले 29 जून और 19 मार्च को भी ब्याज दरों को बढ़ाने का निर्णय लिया जा चुका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications