पीएसएलवी ने उड़ान भरी, पांचों उपग्रह कक्षा में स्थापित (लीड-2)
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 12 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के सफल प्रक्षेपण के बाद उन्नत काटरेसेट-2बी उपग्रह सहित पांचों उपग्रह सोमवार को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो गए।
इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने कहा, "मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि पीएसएलवी 16 की उड़ान सफल रही है। सभी उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर दिया गया है।"
इसरो के 230 टन भार एवं 44 मीटर लंबाई वाले पीएसएलवी ने 819 किलोग्राम वजन वाले पांचों उपग्रहों का कक्षा में स्थापित किया।
पीएसएलवी ने 694 किलोग्राम भार वाले काटरेसेट-2बी के अलावा जिन उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया उनमें अल्जीरियाई दूरसंवेदी उपग्रह अलसेट-2ए (116किलोग्राम वजन), कनाडा के टोरंटो विश्वविद्यालय द्वारा विकसित 6.5 किलोग्राम वजन वाले दो नैनो उपग्रह (एनएलएस 6.1 एआईएसएसएटी-1), स्विटजरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइज साइंसेज द्वारा विकसित एक किलोग्राम भार वाला एसटीयूडीएसएटी उपग्रह तथा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के सात इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों द्वारा विकसित एक किलोग्राम से भी कम भार वाला पिको लघु उपग्रह शामिल हैं।
उड़ान भरने के 20 मिनट बाद यान ने काटरेसेट-2बी को स्थापित किया और उसके बाद अलसेट-2ए और तीन अन्य लघु उपग्रहों को स्थापित किया।
राधाकृष्णन द्वारा पिछले साल इसरो के अध्यक्ष का पद संभालने के बाद यह पहला सफल प्रक्षेपण है।
उन्होंने कहा, "तीन महीने के भीतर दो और उपग्रहों के प्रक्षेपण की योजना है। इसमें एक पीएसएलवी और दूसरा भूसमकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी ) है।"
इस मौके पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी मौजूद थे। उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी और कहा, "इसरो पर देश को नाज है।"
उपग्रहों के प्रक्षेपण के तुरंत बाद बैंगलुरू स्थित उपग्रह नियंत्रण केंद्र ने आईएसटीआरएसी (इसरो टेलीमेंट्री ट्रैकिंग एंड कमांड) की मदद से और लखनऊ, मॉरीशस, रूस में बियर्सलेक, इंडोनेशिया में बियाक और स्वीडन में स्वालबार्ड स्थित केंद्रों के नेटवर्क की मदद से उनकी निगरानी की गई।
प्रक्षेपण के दौरान कुछ क्षणों तक हालांकि इसरो के अधिकारियों को कुछ चिंतित देखा गया।
यह प्रक्षेपण पहले नौ मई को होने वाला था लेकिन तकनीकी कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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