निरुपमा राव ने शुरू की दलाई लामा से वार्ता (लीड-2)
एक अधिकारी ने बताया, "राव सहित विदेश मंत्रालय के अधिकरियों के साथ दलाई लामा की बातचीत आधिकारिक स्थल पर शाम 4.15 बजे शुरू हुई। बंद कमरे में चल रही बैठक में निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री सामधोंग रिनपोचे सहित उच्चस्तरीय अधिकरी भाग ले रहे हैं।"
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने हालांकि इस बैठक पर टिप्पणी करने और राव के दौरे का उद्देश्य बताने से इंकार कर दिया।
इससे पहले राव धर्मशाला के निकटवर्ती गग्गल हवाई अड्डे पर दोपहर बाद 2.15 बजे पहुंचीं और वहां से सीधे निर्वासित तिब्बती सरकार के मुख्यालय पहुंचीं। उनका विमान यहां एक घंटा विलंब से पहुंचा।
राव ने हवाई अड्डे पर मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब देने से इंकार कर दिया।
दलाई लामा के कार्यालय ने भी राव के दौर पर कोई टिप्पणी नहीं की। उल्लेखनीय है कि विदेश सचिव चीन में भारत की राजदूत रह चुकी हैं।
जिले के पुलिस अधीक्षक अतुल फुलजेले ने आईएएनएस को बताया कि तिब्बती सरकार ने राव के ठहरने की व्यवस्था मैकलियोडगंज में की है। राव के सम्मान में शनिवार को रात्रिभोज रखा गया है। वह रविवार को दोपहर बाद दिल्ली के लिए रवाना होंगी।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार राव का दलाई लामा से मिलने और निर्वासित तिब्बती सरकार के अधिकारियों के साथ चर्चा करने के अलावा कोई कार्यक्रम नहीं है।
दलाई लामा के कार्यालय ने हालांकि राव की यात्रा के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है।
दलाई लामा के कार्यालय में संयुक्त सचिव तेंजिन तक्लहा ने कहा, "फिलहाल हमें कोई टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।"
दलाई लामा के कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक विदेश सचिव नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा के साथ निर्वासित तिब्बतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगी।
सूत्रों के अनुसार अपना गृहक्षेत्र छोड़कर 1959 से भारत में रह रहे दलाई लामा की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा होगी।
उल्लेखनीय है कि 'मध्यमार्ग' में विश्वास रखने वाले दलाई लामा तिब्बत के लिए पूर्ण स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं। उनकी नजर में चीन प्रतिकूल तत्व है, क्योंकि वह तिब्बत को स्वायत्तता देने के पक्ष में नहीं है।
ज्ञात हो कि तिब्बत की निर्वासित सरकार को किसी देश ने मान्यता नहीं दी है। लगभग 140,000 तिब्बती निर्वासित जीवन जी रहे हैं। उनमें से 100,000 से अधिक भारत के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं।
पुलिस उपायुक्त (कांगड़ा) आर.एस.गुप्ता ने बताया, "इससे पहले राव की यात्रा तीन-चार बार रद्द हो चुकी है।"
हिमाचल प्रदेश की सरकार ने भी राव को राजकीय मेहमान घोषित किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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