भारत बंद : विपक्षी दलों और सरकार के बीच रस्साकसी (राउंडअप)

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि वामपंथी पार्टियों और राजग ने एक ही दिन भारत बंद का आयोजन किया है। उन्होंने कहा, "जहां तक मुझे स्मरण है, मैं ऐसा पहली बार देख रहा हूं, जब इतनी सारी पार्टियां भारत बंद के लिए एकजुट हुई हैं।"

आडवाणी यहां भारत बंद के लिए रणनीति तय करने हेतु भाजपा नेतृत्व वाले राजग के वरिष्ठ नेताओं की आयोजित एक बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे। राजग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि वह जनता के खिलाफ सरकार के पूर्वनियोजित इस षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं करेगा।

यद्यपि वामपंथी पार्टियों ने एक ही दिन अलग से बंद का आह्वान किया है, लेकिन राजग ने कहा है कि सभी विपक्षी पार्टियां अपनी विचारधाराओं को दरकिनार कर हाल की मूल्य वृद्धि को वापस लेने की अपनी मांग और विरोध को दर्ज कराने के लिए एकजुट होने को मजबूर हुई हैं।

बैठक में तय किया गया कि विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के लिए राजग के नेताओं को विभिन्न शहरों में तैनात किया जाएगा। भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी, वरिष्ठ भाजपा नेता राजनाथ सिंह, जनता दल (युनाइटेड) के नेता और राजग संयोजक शरद यादव दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

इसी तरह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, सुषमा स्वराज भोपाल में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली और पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी लखनऊ में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू हैदराबाद में, भाजपा महासचिव अनंत कुमार बेंगलुरू में और भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद पटना में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने महंगाई के लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और मूल्य वृद्धि वापस न लेने के सरकार के फैसले की उसने कड़ी आलोचना की है। पार्टी पोलित ब्यूरो ने एक बयान में कहा कि यह बंद सरकार के लिए एक चेतावनी है। इसके बाद भी वह नहीं जागी तो वामपंथी दल बड़ा आंदोलन करने से भी नहीं चूकेंगे।

बंद के दौरान देश के 62 लाख से ज्यादा ट्रक और अन्य मालवाहक वाहन सड़कों पर नहीं उतरेंगे। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को अनुचित बताया और यह घोषणा की।

उन्होंने कहा, "भारत में सड़क परिवहन क्षेत्र के गैर राजनीतिक संगठन एआईएमटीसी ने देश के लोगों की एकजुटता के प्रदर्शन के लिए पांच जुलाई को हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है। देश में लोग पहले ही महंगाई से परेशान हैं और ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।"

पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा ने कहा है कि विपक्षी दलों की ओर से आहूत राष्ट्रव्यापी बंद न्यायोचित नहीं है क्योंकि मूल्य वृद्धि से जनता पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है।

उन्होंने कहा, "भाजपा लोगों को बरगला रही है। बंद गरीब और आम जनता के हितों के खिलाफ है। देहाड़ी मजदूर अपने हक से वंचित रहेंगे ही बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी उठानी पड़ेगी।"

उन्होंने कहा, "केरोसीन के तेल में प्रति लीटर हुई तीन रुपये की वृद्धि का मतलब है उसे 50 पैसे प्रतिदिन अतिरिक्त खर्च करने होंगे जबकि गैस की कीमत में हुई 35 रुपये की वृद्धि का अर्थ है प्रतिदिन उसे एक रुपये अतिरिक्त खर्च करना होगा। "

इससे पहले उनके मंत्रालय की ओर से जारी एक विज्ञापन के जरिए सरकार की ओर से जनता को यह समझाने की कोशिश की गई कि मूल्य वृद्धि किन मजबूरियों के तहत की गई है। विज्ञापन में यह भी दर्शाया गया है कि पड़ोसी देशों के मुकाबले हमारे देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसीन और गैस बहुत सस्ते हैं।

विज्ञापन में कहा गया है कि कीमतों में वृद्धि के बाद भी सरकार को 53,000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है और देश की 80 प्रतिशत ईंधन जरूरत की आपूर्ति विदेशों से पेट्रोलियम के आयात पर निर्भर है।

विज्ञापन में कहा गया कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 147 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं तब भी सरकार ने सामान्य दाम पर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की थी। विज्ञापन में कहा गया कि आज चुकाई जा रही छोटी सी कीमत कल के लिए बड़ा फायदा बनेगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कोलकाता में कहा कि ईंधन कीमतों में हुई वृद्धि वापस लेने की सरकार की कोई योजना नहीं है। "कीमत वृद्धि के फैसले को वापस लेने का कोई प्रश्न ही नहीं है।"

उधर, रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष, ममता बनर्जी ने ईंधन कीमतों में वृद्धि के खिलाफ आयोजित बंद की आलोचना की है।

बनर्जी ने कहा, "हम इस बंद का समर्थन नहीं करते। बंद से आम आदमी की पीड़ा कम नहीं होगी।"

कालीघाट स्थित अपने आवास पर मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए बनर्जी ने पूछा, "माकपा नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार ने पिछले 34 सालों में बंद की राजनीति करने के अलावा कौन सा अच्छा काम किया है?"

बनर्जी ने सवाल किया, "एक दिन के बंद का मतलब व्यापार का बड़ा नुकसान। यदि वे ईंधन की मूल्य वृद्धि से इतने चिंतित हैं तो राज्य सरकार ईंधन और रसोई गैस पर से कर क्यों नहीं हटा रही है?"

बनर्जी ने कहा, "बंद के दौरान उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति आधे पर आ जाती है, परिणामस्वरूप बुनियादी सुविधाएं संकट में पड़ जाती हैं और इसके साथ ही आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें अनावश्यक रूप से बढ़ जाती हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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