भारत बंद समाधान नहीं: सरकार
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए गए एक विज्ञापन में कहा गया है कि "भारत बंद समस्या का समाधान नहीं है।"
विज्ञापन में कहा गया है कि कीमतों में वृद्धि के बाद भी सरकार को 53,000 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है और देश की 80 प्रतिशत ईंधन जरूरत की आपूर्ति विदेशों से पेट्रोलियम के आयात पर निर्भर है।
विज्ञापन में कहा गया, "अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण घरेलू बाजार में दाम प्रभावित होते हैं।"
सरकार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के अनुसार रसोई गैस की कीमतों में 261 रुपये की वृद्धि की जरूरत है, लेकिन सरकार ने केवल 35 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की है।
इसमें कहा गया कि तेल का आयात करने वाले सभी देशों में रसोई गैस और केरोसीन की कीमतें भारत में सबसे कम हैं।
पाकिस्तान में गैस सिलेंडर की कीमत 577 रुपये, बांग्लादेश में 537 रुपये, श्रीलंका में 822 रुपये और नेपाल में 782 रुपये है जबकि भारत में इसकी कीमत केवल 345 रुपये है।
इसी तरह पाकिस्तान में केरोसीन की कीमत 35.97 रुपये प्रति लीटर, बांग्लादेश में 29 रुपये प्रति लीटर, श्रीलंका में 21 रुपये प्रति लीटर और नेपाल में 39 रुपये प्रतिलीटर है जबकि भारत में इसकी कीमत 12.32 रुपये प्रति लीटर है।
विज्ञापन में कहा गया कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 147 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं तब भी सरकार ने सामान्य दाम पर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की थी।
विज्ञापन में कहा गया कि आज चुकाई जा रही छोटी सी कीमत कल के लिए बड़ा फायदा बनेगी।
यह विज्ञापन भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए सोमवार को आयोजित किए जाने वाले बंद से पहले प्रकाशित किया गया है।
कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (सपं्रग) की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपना फैसला वापस नहीं लेगी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वह विपक्षी दलों के विचार से अवगत हैं लेकिन लोग यह कदम उठाने के पीछे सरकार की मजबूरी को समझेंगे।
इस सप्ताह कि शुरूआत में उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हमारे देश के लोग इस बात को समझने के लिए पर्याप्त रूप से समझदार हैं कि देश की मजबूती और समृद्धि को लोकप्रियता के लिये बलि नहीं चढ़ाया जा सकता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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