नेपाल की 'जीवित देवी' कठिन परीक्षा में उत्तीर्ण
काठमांडू, 3 जुलाई (आईएएनएस)। नेपाल की 'जीवित देवी' के रूप में हजारों हिंदुओं और बौद्धों द्वारा प्रतिष्ठापित 15 वर्षीय असाधारण किशोरी ने एक कठिन स्कूली परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रचा है। 'कुमारी' के रूप में चयन के बाद किशोरी कभी स्कूल नहीं गई।
काठमांडू घाटी की तीन 'कुमारियों' में से एक चनीरा बज्राचार्य लोगों की आंखों में सचमुच देवी की तरह बस गई जब शनिवार को स्कूल परित्याग परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। वह 'विशिष्टता' के साथ उत्तीर्ण हुई और उसने 80 प्रतिशत अंक हासिल किए।
ललितपुर शहर की चनीरा नेपाल की 'लौह-द्वार' परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली पहली जीवित देवी बन गई है।
इस परीक्षा में 385,000 विद्यार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से केवल 64.31 प्रतिशत श्रेणी हासिल कर पाए। ऐसे में चनीरा की उत्तीर्णता को अद्भुत माना जा रहा है। चनीरा के मामले को इसलिए असाधारण माना जा रहा है, क्योंकि वह कभी स्कूल नहीं गई थी और उसने अपने धार्मिक कार्यालय में अधिकारियों की कड़ी निगरानी में प्रश्नों के उत्तर लिखे थे।
कुमारी, जिसे हिंदू शक्ति की अवतार 'तलेजू भवानी' के रूप में सम्मान देते हैं, का चयन बौद्ध समुदाय से 32 शुभ लक्षणों के आधार पर किया गया था। इस परंपरा की शुरुआत नेपाल के तत्कालीन राजा ने की थी।
कुमारियों की प्रतिष्ठा शाही परिवार की रक्षक के रूप में भी है। राजा भी विनम्रतापूर्वक जीवित देवी का सम्मान करते थे।
परंपरा के अनुसार चनीरा अब जल्द ही कुमारीत्व-पद छोड़ने वाली है, क्योंकि मासिक धर्म शुरू होने के बाद कुमारी का पद अन्य को सौंप दी जाती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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