प्रधानमंत्री तेल कंपनियों के साथ या जनता के : गडकरी (लीड-1)

पांच जुलाई के भारत बंद की तैयारियों के बारे में यहां मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए गडकरी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जवाब देना चाहिए कि अर्थशास्त्री होते हुए भी मनमोहन सिंह बढ़ती कीमतों पर लगाम लगा पाने में क्यों विफल हो गए हैं।

इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सोनिया और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए गडकरी ने कहा कि सरकार के पास देश में गरीब लोगों की सही संख्या तक की जानकारी नहीं है।

गडकरी ने मनमोहन से जानना चाहा है कि उत्पादन में वृद्धि के सरकार के दावे के बावजूद खाद्य पदार्थो की कीमतें क्यों बढ़ती जा रही हैं और महंगाई को रोकने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं।

गडकरी ने कहा कि सरकार द्वारा गठित समिति ने सुझाव दिया है कि देश में गरीबों की संख्या बढ़ी है और आबादी का एक बड़ा हिस्से की आमदनी 20 रुपये प्रति दिन से कम है।

गडकरी ने कहा कि सरकार को जैव ईंधन को बढ़ावा देना चाहिए और पेट्रोल में 22.5 प्रतिशत तथा डीजल में 15 प्रतिशत इथेनाल मिलाया जा सकता है। "सरकार इसे बढ़ावा क्यों नहीं दे रही है?"

महंगाई के लिए सरकार की गलत नीतियों को दोषी ठहराते हुए गडकरी ने कहा कि चीनी जिस दर पर निर्यात की गई, उसकी तीनगुनी दर पर आयात की गई।

गडकरी ने कहा कि 1,800 करोड़ रुपये कीमत का अनाज अपर्याप्त भंडारण क्षमता के कारण नष्ट हो गया।

गडकरी ने कहा कि विभिन्न पार्टियां कीमतों में वृद्धि के ज्वलंत मुद्दे पर एकजुट हो गई हैं। उन्होंने हर वर्ग के लोगों से, खासकर व्यापारियों से आह्वान किया कि वे बंद को सफल बनाएं। गडकरी ने कहा कि पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी आपात सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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