लाहौर में आत्मघाती हमले में 43 की मौत (लीड-6)
यह हमला गुरुवार की रात उस समय हुआ, जब सफेद संगमरमर की इस दरगाह में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सज्जाद भुट्टा ने कहा, "विस्फोटों में मरने वालों की संख्या अब 43 हो गई है। जबकि 174 लोग घायल हैं। लगभग एक दर्जन लोगों की हालत अभी गंभीर बनी हुई है।"
अधिकारी के मुताबिक अब तक 28 शवों की शिनाख्त हो चुकी है। पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ ने हमले में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों के लिए पांच लाख पाकिस्तानी रुपये और प्रत्येक घायल को 75,000 पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है।
वेबसाइट 'द न्यूज डॉट कॉम' के लाहौर पुलिस ने बतया कि एक हमलावर की शिनाख्त उस्मान यासीन के रूप में की गई है। वह लाहौर जिले के हदयारा बारकी का रहने वाला था। दूसरे की शिनाख्त अभी नहीं हुई है।
इससे पहले अधिकारियों ने बताया कि दो आत्मघाती हमलावरों ने दरगाह परिसर में दो जगहों पर विस्फोट कर दिया। दोनों ने अपने शरीर से 20 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक बांध रखे थे। यह दरगाह 11वीं सदी के सूफी संत अबुल हसन अली हाजवेरी की है। उन्हें आमतौर पर दाता गंज बक्श के नाम से जाना जाता है। यह दरगाह बेघर लोगों को पनाह देने का काम करता है और भूखों को 24 घंटे यहां मुफ्त भोजन प्रदान किया जाता है। अन्य इलाकों से आने वाले श्रद्धालु भी इस दरगाह में पनाह लेते हैं, खासतौर से बेसमेंट में सोते हैं।
पहले आत्मघाती हमलावर ने दरगाह के बेसमेंट में गुरुवार रात लगभग 10.46 बजे अपने आप को उड़ा लिया। दूसरा विस्फोट दो मिनट बाद उस समय हुआ जब दूसरे हमलवार ने दरगाह के अहाते में दाखिल होने के बाद खुद को विस्फोट से उड़ा दिया। पुलिस के अनुसार हमलावरों की उम्र 20-22 के बीच थी। दरबार के वजूखाने के निकट एक बम बरामद किया गया। आत्मघाती हमले के बाद घटना स्थल पर लोगों के शव इधर-उधर बिखरे हुए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्हें दो विस्फोटों की आवाज सुनाई दी और फिर चारों ओर धुआं फैल गया। मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने बताया, "मैंने देखा कि दरगाह के चारों ओर से धुंआ उठ रहा था। पूरे इलाके में जलने की बू फैल गई थी।"
घटना के समय दरगाह में मौजूद एक जायरीन ने बताया,"विस्फोट के बाद पुरुष, महिलाएं और बच्चे चारों तरफ भाग रहे थे। सभी चीख-चिल्ला रहे थे। पूरा बेसमेंट मलबे में तब्दील हो गया।"
दरगाह के प्रभारी, मियां साजिद अहमद ने बताया कि हमले से संबंधित धमकियां पहले से मिल रही थीं। सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने की वजह से यह हादसा हुआ। बम निरोधक दस्ते के अधिकारियों ने शवों के नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए इक्कठा किया। पुलिस ने इलाके को चारों तरफ से घेर लिया है। पुलिस ने हमलावरों के शव बरामद कर लिए हैं।
हमले की जानकारी देते हुए लाहौर के पुलिस आयुक्त खुसरो परवेज ने कहा, "यह हमला एक बड़ी साजिश का नतीजा है। हमारे लोग ही दूसरों के हाथों के हथियार बन रहे हैं।"
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (आपरेशन) चौधरी शफीक अहमद ने समाचार पत्र डान को बताया कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई बाल-बेयरिंग्स और अन्य सामग्रियों को इकट्ठा कर लिया गया है।
विस्फोट की खबर सुनने के बाद सैकड़ों की संख्या में लोग अपने रिश्तेदारों का हाल जानने दरगाह पर पहुंच गए हैं।
विस्फोटों के तत्काल बाद स्थानीय दुकानकारों ने अपनी दुकानें बंद कर ली। यद्यपि हमला देर रात को हुआ, फिर भी शहर के निवासी हमले के विरोध में अपने घरों से बाहर निकल पड़े। उन्होंने मुख्य सड़क को जाम कर दिया, टायरों में आग लगा दी और पुलिस पर पथराव किया।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने हमले की निंदा की और आतंकियों से लड़ने का संकल्प लिया। जरदारी ने कहा कि इस विस्फोट से यह जाहिर होता है कि आतंकियों के भीतर किसी भी धर्म के प्रति सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कदम से आतंकवाद से लड़ने के सरकार के संकल्प पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
प्रधानमंत्री गिलानी ने कहा, "इस तरह की कायराना कार्रवाई इस बात का संकेत करती है कि सीमावर्ती इलाकों में अपनी पराजय के बाद आतंकियों ने शहरों में बेगुनाह लोगों को अपना निशाना बनाया है।"
ज्ञात हो कि इसके पहले मई महीने में लाहौर में अहमदिया समुदाय की दो मस्जिदों पर आतंकवादियों ने हमला बोला था, जिसमें 80 से अधिक लोग मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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