काले पत्थर चढ़ाने से होती हैं मुरादें पूरी

अरविंद मिश्रा

इटावा, 2 जुलाई (आईएएनएस)। आमतौर पर आपने देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं को फूल, माला और धूपबत्ती से साथ पूजा-अर्चना करते देखा होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के एक देवी मंदिर में पूजा-पाठ की एक अनोखी रस्म है। यहां श्रद्धालु देवी पर काले पत्थर के टुकड़े चढ़ाकर पूजा-अर्चना करके मन्नत मांगते हैं।

इटावा जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर नगलाभीटन गांव स्थित भुजंगा देवी के मंदिर में सैकड़ों साल से यह रिवाज चल रहा है। श्रद्धालु मनोकामना पूरी करने के लिए देवी भुजंगा को काले पत्थर चढ़ाकर प्रसन्न करते हैं।

मंदिर के पुजारी बाबा जगराम दास ने आईएएनएस को बताया कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से भुजंगा देवी की चौखट पर शीश झ्झुकाते हैं और जल अर्पित करके काले पत्थर चढ़ाते हैं उनकी हर मुराद पूरी होती है।

पैंसठ वर्षीय पुजारी के मुताबिक मंदिर में यह परंपरा कब से चल रही है यह बताना थोड़ा मुश्किल है लेकिन इलाके के बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि करीब पिछले 200 साल से इस मंदिर में यह रिवाज कायम है।

इस अनोखे रिवाज के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। स्थानीय निवासी 73 वर्षीय मंगल प्रसाद शाक्य कहते हैं कि काले पत्थर चढ़ाने की परंपरा मंदिर के निर्माण के समय से जुड़ी है।

ऐसी किंवदंती है कि स्थानीय मलाजनी रियासत के राजा कार्तिकेय को एक दिन देवी ने सपना दिया कि नगलाभीटन के काले पहाड़ में उनकी मूर्ति मौजूद है। वह उसे खुदवाकर निकलवाएं और वहीं पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराएं। साथ ही उन्होंने सपने में राजा से यह भी कहा कि जो भक्त पहाड़ के अंदर से निकलने वाले काले पत्थरों को उन पर अर्पित करेगा उसकी हर मनोकामना पूरी होगी।

राजा कार्तिकेय ने पहाड़ को खुदवाया तो उसमें से करीब छह फुट लंबी काले रंग की देवी की मूर्ति निकली, जिसका नामकरण भुजंगा देवी के रूप में किया गया। राजा ने वहीं पर देवी के भव्य मंदिर का निर्माण करवाकर सबसे पहले खुद ही काले पत्थर चढ़ाकर पुत्र रत्न की मन्नत मांगी। जल्द ही राजा की मनोकामना पूरी हो गई तब से वहां श्रद्धालु काले पत्थर चढ़ाते आ रहे हैं।

पुजारी बताते हैं कि पहले श्रद्धालु पहाड़ से पत्थर तोड़कर लाते थे जिससे धीरे-धीरे उस पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूट गया। पहाड़ समाप्त न हो इसके लिए अब श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाये गये काले पत्थरों को मूर्ति से उतारकर मंदिर के बाहर बनवाए गए एक कुंड में रख दिया जाता है। जब अन्य श्रद्धालु आते हैं तो वे कुंड से वही पत्थर लेकर मूर्ति पर अर्पित करते हैं। यह प्रक्रिया चलती रहती है।

वैसे तो मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि के दिनों में यहां हजारों की संख्या में लोग भुजंगा देवी के दशर्न कर मन्नत मांगने आते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर प्रांगण के निकट एक विशाल मेला लगता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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