एजेंसियों के ढुलमुल रवैए से हुए नौका हादसे
बलिया और बहराइच में गंगा और सरयू नदी में दुर्घटना की शिकार हुईं दोनों नावों का संचालन अवैध रूप से हो रहा था। नाविकों के पास नौका परिवहन का आवश्यक लाइसेंस भी नहीं था। दोनों नाविक अभी भी फरार हैं। अगर सरकारी एजेंसियां अपना दायित्व गंभीरता से निभातीं तो दोनों हादसे टाले जा सकते थे।
बलिया जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन और जिला परिषद को नावों के अवैध संचालन को रोकने के लिए नियिमत निरीक्षण करना होता है लेकिन ऐसा कभी-कभार ही होता है।
बलिया और बहराइच में दुर्घटनाओं की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि दोनों नावें जर्जर हालत में चल रही थीं।
नदियों में नौका संचालन के लिए कई चीजें निर्धारित की गई हैं। सबसे पहले जिला परिषद द्वारा घाटों की नीलामी होती है। ठेकेदार को एक साल तक निर्धारित नावों का संचालन कराने की अनुमित होती है। एक साल बाद यही प्रक्रिया फिर दोहराई जाती है।
जिला परिषद, जिला प्रशासन के साथ नाविकों को नाव चलाने का लाइसेंस जारी करता है, जिसका हर साल नवीनीकरण होता है।
जिला प्रशासन और जिला परिषद के अधिकारियों को ही इस बात की भी जांच करनी होती है कि नाविक नावों में ओवरलोडिंग तो नहीं कर रहे हैं। दोनों हादसों में यही एक सबसे मुख्य कारण रहा है।
बहराइच के जिला अधिकारी रिग्जियान सैंफिल ने आईएएनएस से कहा कि इन दुर्घटनाओं के लिए निश्चित तौर पर हम जिम्मेदार हैं..हमें इनसे सबक लेना चाहिए। मैंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि नावों में ओवरलोडिंग न होने पाए।
बलिया जिला प्रशासन ने हादसे से पहले अवैध नौका संचालन रोकने के लिए जिला परिषद से कई बार घाटों की संख्या और परिवहन में लगी नावों की जानकारी मांगी थी।
बलिया के जिलाधिकारी सैंथिल पांडियन ने आईएएनएस से कहा कि हमने जिला परिषद से तीन बार घाटों और नावों की संख्या की जनकारी मांगी लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
अधिकारियों के मुताबिक घाटों पर ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो बिना पंजीकरण के नौ परिवहन में लगे हैं।
उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुर, आगरा, बलिया, जौनपुर, गोरखपुर सहित 10 जिलों में विभिन्न नदियों के घाटों पर करीब 20,000 नावें हैं।
राज्य नाविक संघ से महासिचव एस. एल. निषाद कहते हैं कि सबसे ज्यादा नावें इलाहाबाद में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर संचालित होती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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