कश्मीर में दो और गोलियों के शिकार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में पुलिस का कहना है कि अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ़ की गोली से दो लोगों की मौत हो गई है.
एक मौत सोपोर में हुई जबकि दूसरी मौत बारामूला में हुई. पुलिस का कहना है कि दोनों जगहों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए सीआरपीएफ़ ने गोलियाँ चलाईं.
अभी घायलों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है.
लेकिन सीआरपीएफ़ के महानिदेशक विक्रम श्रीवास्तव ने बीबीसी से हुई बातचीत में इस बात से इनकार किया है कि सोमवार को कश्मीर घाटी में सीआरपीएफ़ ने गोली चलाई है.
सीआरपीएफ़ के महानिदेशक ने कहा, संयम बरत रहे हैं
राज्य सरकार के इस आरोप पर कि सीआरपीएफ़ प्रशासन की कोई बात सुन नहीं रही है, उनका कहना है कि सीआरपीएफ़ पूरे संयम के साथ काम कर रही है और वहाँ पुलिस की सहायता के लिए मौजूद है.
गोलीबारी में एक व्यक्ति तजामुल अहमद की मौत सोपोर में हुई है जबकि तौक़ीद अहमद की मौत बारामूला में हुई है.
पिछले चार दिनों में सीआरपीएफ़ की गोली से मारे गए लोगों की संख्या पाँच हो गई है. जबकि जून के महीने में ही अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है.
प्रदर्शनकारी गत शुक्रवार से कर्फ़्यू का उल्लंघन करके प्रदर्शन कर रहे हैं.
सोपोर के लोग सीआरपीएफ़ की गोलीबारी को लेकर उत्तेजित हैं और उन्होंने रविवार रात को भी कर्फ़्यू का उल्लंघन किया.
सोमवार को जब लगभग पाँच हज़ार प्रदर्शनकारी पुलिस स्टेशन की ओर मार्च कर रहे थे, उस समय पुलिस ने फ़ायरिंग की.
अर्धसैनिक बलों की ओर से की जा रही गोलीबारी के सिलसिले में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार रात को बात की थी और उन्होंने केंद्रीय सुरक्षाबलों की गोलीबारी पर चिंता जताई थी.
राज्य सरकार के प्रवक्ता का कहना था कि गृह मंत्री चिदंबरम ने मुख्यमंत्री को राज्य में शांति बहाली के लिए पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है.
राज्य के क़ानून मंत्री अली मोहम्मद सागर ने रविवार को पत्रकारवार्ता में कहा था कि सुरक्षाबलों की गोलीबारी न्यायोचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ़ ने मुख्यमंत्री की उस हिदायत को नहीं माना है कि वे एहतियात बरते.
क़ानून मंत्री अली मोहम्मद सागर ने कहना था,''राज्य सरकार चरमपंथियों और अलगाववादियों के राजनीतिक नेतृत्व के ख़िलाफ़ लड़ रही है. लेकिन हम अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ नहीं लड़ सकते जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर चुनाव में हिस्सा लिया.''
दरअसल शुक्रवार को राजधानी श्रीनगर से 50 किलोमीटर उत्तर सोपोर में भारत विरोधी प्रदर्शन के दौरान फ़ायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी और तीन लोग घायल हो गए थे. इसके बाद सोपोर में कर्फ़्यू लगा दिया गया था.
इस मौत के विरोध में हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के दोनों धड़ों ने 'सोपोर चलो' का आव्हान किया था.
इस बीच रविवार को कर्फ़्यू के बावजूद लोग प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए और सुरक्षाबलों ने गोलियाँ चलाई. इस गोलीबारी में एक नवयुवक की और मौत हो गई.
हालांकि प्रशासन ने सोपोर मार्च को ध्यान में रखते हुए सोमवार और मंगलवार को सभी स्कूल कॉलेज बंद रखने की घोषणा की थी.
लेकिन सोमवार को प्रदर्शनकारी पुराने श्रीनगर के रजौरी कदल से निकले.
श्रीनगर-बारामूला मार्ग पर कोई दस किलोमीटर के मार्च के बाद प्रदर्शनकारियों को पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने रोका.
वहाँ कम से कम चार प्रदर्शनकारियों के घायल होने की ख़बरें हैं.












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