कनाडा होगा भारत का नौवां असैन्य परमाणु ऊर्जा साझेदार

टोरंटो, 28 जून (आईएएनएस)। भारत और कनाडा के रिश्तों में रविवार को एक नया मोड़ आया जब संदेह और असहजता पीछे छोड़ते हुए दोनों देश रणनीतिक साझेदार बन गए।

कनाडा ने वर्ष 1974 में भारत के पहले परमाणु परीक्षण और वर्ष 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद भारत के अंतर्राष्ट्रीय परमाणु जगत से अलगाव का नेतृत्व किया था। अब वह ऐसा नौवां देश बन गया है कि जिसके साथ भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में समझौता किया है। इससे भारत-अमेरिका समझौते की तर्ज पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय परमाणु व्यापार के दरवाजे खुल गए हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर के बीच बैठक के बाद हुए समझौते से कनाडा की परमाणु कंपनियों को अगले 10 वर्षो में भारत के 40 अरब डॉलर के परमाणु ऊर्जा बाजार हिस्सेदारी का रास्ता खुला है।

हार्पर के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने कहा, "जिस परमाणु समझौते पर हमने हस्ताक्षर किए हैं, उससे इस क्षेत्र में हमारे सहयोग के इतिहास का नया अध्याय शुरू हुआ है।"

सिंह ने कहा, "यह अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में परिवर्तन को दर्शाता है और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में परस्पर लाभकारी सहयोग के दरवाजे खोलता है।"

भारत इससे पहले आठ देशों-रूस, फ्रांस, रूस, मंगोलिया, कजाकिस्तान,आर्जेटीना, नामीबिया और ब्रिटेन के साथ परमाणु करार कर चुका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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