बजट कटौती को लेकर मतभेद

जी-20 सम्मेलन कनाडा में हो रहा है जहाँ भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी पहुंचे हुए हैं. अमरीकी वित्त मंत्री ने ये भी कहा है कि विश्व की अर्थव्यवस्था में जो सुधार आया है वो विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और अमरीका में आए सुधार की वजह से है.
जी-20 सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब देश इस बात को लेकर बँटे हुए हैं कि उन्हें बजट घाटे को कम करने पर जो़र देना चाहिए या आर्थिक विकास में तेज़ी लाने के लिए काम करना चाहिए. अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा की चिंता है कि यूरोपीय देशों ने वित्तीय बचत के लिए जो क़दम उठाएँ हैं उससे आर्थिक मंदी से उबरने में देरी हो सकती है.
ओबामा ने जी-20 देशों से कहा है कि वो एकजुट होकर काम करें और विकास को बढ़ावा दें. वहीं अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने कहा है कि बजट घाटे को कम करने की यूरोपीय देशों की कोशिशें ग़लत दिशा में उठाया क़दम है. उन्होंने कहा कि अर्जेंटीना ने भी 2001 में ऐसा ही किया था और काफ़ी नुकसान हुआ था.
विकास या बचत
बीबीसी संवाददाता एंड्रयू वॉकर का कहना है कि जी-20 देशों में इस बात को लेकर दुविधा है कि घाटे को कम करने के लिए कौन सा समय सही होगा.
मनमोहन सिंह भी जी-20 में हिस्सा लेने के लिए कनाडा में है. वे बराक ओबामा, ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन, फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सार्कोज़ी और जापान के प्रधानमंत्री के साथ अलग से मुलाक़ात करेंगे.
वे ब्राज़ील, रूस और चीन के नेताओं से भी मिलेंगे.27 जून को मनमोहन सिंह की मुलाक़ात कनाडा के प्रधानमंत्री से होगी. परमाणु समझौते के अलावा भारत और कनाडा के बीच खनन, उच्च शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को लेकर समझौते होने की संभावना है.












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