सरकारी विज्ञापन में ईंधन मूल्य वृद्धि को जायज ठहराया
इस मूल्य वृद्धि पर सत्ताधारी गठबंधन के हिस्सेदारों और विपक्षी पार्टियों द्वारा पहले से ही विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह ने शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत को नियंत्रण मुक्त करने को अपनी सहमति दे दी, जिसका परिणाम यह हुआ कि अधिकांश महानगरों में पेट्रोल की कीमत कम से कम 3.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई। सरकार ने डीजल की कीमत में भी दो रुपये प्रति लीटर, केरोसिन में तीन रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस की कीमत में 35 रुपये प्रति सिलिंडर की वृद्धि कर दी।
इसके बाद रविवार को कुछ राष्ट्रीय अखबारों में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से एक खास तरह का आधा पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। विज्ञापन का शीर्षक है "बेहतर कल के लिए आज एक छोटी कीमत अदा करें।"
विज्ञापन में कहा गया है कि मूल्य वृद्धि के बावजूद सरकार पर साल में 53,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
विज्ञापन में पड़ोसी देशों में रसोई गैस और केरोसिन की तुलनात्मक कीमतें एक टेबल के तहत प्रदर्शित की गई हैं।
उदाहरण के तौर पर श्रीलंकाइयों को रसोई गैस के लिए 782 रुपये प्रति सिंलिंडर और केरोसिन के लिए 39 रुपये प्रति लीटर का भुगतान करना पड़ता है। यह कीमत दिल्ली में रसोई गैस की प्रति सिलिंडर 345 रुपये और केरोसिन की प्रति लीटर 12.32 रुपये की नई दर से भी काफी अधिक है।
विज्ञापन में कहा गया है, "देश की ईंधन जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा होता है। इससे स्वाभाविक रूप से अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण कीमतों पर असर पड़ता है।"
वामपंथी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों (केरल व पश्चिम बंगाल) में ईंधन मूल्यों में वृद्धि के खिलाफ बंद का आयोजन किया गया। संप्रग सहयोगियों, जैसे तृणमूल कांग्रेस और डीएमके ने भी अपनी नाखुशी जाहिर की है, खासतौर से इसलिए क्योंकि उनसे संबंधित राज्यों में अगले वर्ष चुनाव होने हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी ईंधन मूल्य वृद्धि के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।
यहीं पर सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने यह कहते हुए सरकार के कदम का समर्थन किया है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण अस्थिर हालात के मद्देनजर कीमतों में वृद्धि के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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