वैज्ञानिकों ने हिम युग की समाप्ति के कारण खोजे
वाशिंगटन, 26 जून (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों ने अंतिम हिम युग की समाप्ति के कारणों का पता लगा लिया है। हिम युग की समाप्ति के चलते ही जलवायु गर्म हुई थी और पृथ्वी पर मानव सभ्यता जन्म ले सकी थी।
एक नए अध्ययन के मुताबिक भूवैज्ञानिक परिवर्तन के तहत हिम युग की समाप्ति हुई। उत्तरी गोलार्ध में बर्फ की परतें समाप्त होने के साथ दक्षिण में तेजी से गर्माहट फैलने लगी थी।
ज्यादातर वैज्ञानिकों का कहना है कि कक्षीय बदलाव के चलते पृथ्वी के उत्तरी हिस्से पर अधिक धूप पड़ने लगी थी जिससे बर्फ की परते पिघलने लगी थीं लेकिन दक्षिण में यह प्रक्रिया तेजी से हुई थी।
दक्षिण में गर्मी के अधिक तीव्रता से बढ़ने का कारण बताते हुए शोधकर्ताओं ने वायु के बहाव में हुए वैश्विक बदलाव को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने 20,000 वर्ष पहले उत्तरी गोलार्ध से बर्फ की पर्ते पिघलने के पीछे की जिम्मेदार कई घटनाओं की एक श्रृंखला पेश की है।
पिघलती बर्फ ने पृथ्वी पर बहने वाली हवाओं को प्रभावित किया था। गर्म हवा और समुद्री जल दक्षिण की ओर बढ़ने लगे थे और कार्बन डाई ऑक्साइड गहरे समुद्रों से निकलकर वायुमंडल में आ गई थी जिससे पृथ्वी पर ऊष्मा और अधिक बढ़ गई थी।
वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के गर्म होने की प्रक्रिया समझाने की अपनी परिकल्पना के लिए गुफा निर्माण, ध्रुवीय बर्फ और गहरे समुद्र के अवसादों में संरक्षित जलवायु आंकड़ों का इस्तेमाल किया था।
कोलंबिया विश्वविद्यालय के लैमोंट-डूहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी (सीयूएलडीईओ) के सह-अध्ययनकर्ता बॉब एंडरसन कहते हैं कि उन्होंने इस अध्ययन में उत्तर में गर्मी बढ़ने और फिर दक्षिण में गर्मी बढ़ने व हिम युग की समाप्ति को समझाने के लिए हाल ही में हुए कई संबंधित अध्ययनों का इस्तेमाल किया था।
एंडरसन ने कहा कि पृथ्वी से अंतिम हिम युग की समाप्ति की प्रक्रिया आज भी जारी है और भविष्य में होने वाले जलवायु परिवर्तन पर इसका असर होगा।
पृथ्वी पर प्रत्येक 100,000 वर्ष बाद हिम युग आता है। सूर्य के सापेक्ष पृथ्वी की स्थिति बदलने से ऐसा होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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