पेट्रोल नियंत्रण मुक्त; डीजल, केरोसीन, एलपीजी के दाम बढ़े (लीड-1)
अब पेट्रोल 3.50 रुपये प्रति लीटर, डीजल दो रुपये प्रति लीटर, केरोसीन 3 रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस 35 रुपये प्रति सिलेंडर महंगे हो गए हैं। नई दरें शुक्रवार आधी रात से लागू होंगी।
इस फैसले से सरकार को वित्तीय स्थिति सुधारने और अन्य कार्यक्रमों के लिए धन जारी करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले उच्चाधिकार प्राप्त मंत्री समूह ने शुक्रवार को ईंधन की कीमतों को बाजार आधारित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इससे तेल खनन और विपरण करने वाली कंपनियों की वित्तीय सेहत में सुधार आएगी।
बैठक के बाद पेट्रोलियम सचिव एस. सुंदरेशन ने कहा कि रिफायनरी के स्तर पर और खुदरा बिक्री के स्तर पर पेट्रोल की कीमत बाजार द्वारा तय की जाएगी।
इसके परिणाम स्वरूप पेट्रोल की कीमत 3.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ जाएगी।
सरकार के इस फैसले से पहले से ही आसमान छू रही महंगाई के और बढ़ने की संभावना है।
इस बारे में सुंदरेशन ने पत्रकारों से कहा, "हम लोगों की भावना से पूरी तरह अवगत हैं। इसके कारण होने वाली कुछ परेशानियों को हम समझते हैं। लेकिन देश की अर्थव्यवस्था के हित में यह पूरी तरह से जरूरी है कि उपभोक्ता भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई वृद्धि में हिस्सेदार बनें।"
उन्होंने कहा कि अंतत: डीजल की कीमत को भी बाजार आधारित बनाना पड़ेगा, लेकिन सरकार केरोसीन और रसोई गैस की कीमत पर नियंत्रण कायम रखेगी।
मंत्री समूह ने किरीट पारेख समिति की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला लिया है। समिति ने ईंधन की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने की वकालत की है।
सुंदरेशन कहा, "देश में पेट्रोल के उपभोक्ता बाजार आधारित कीमत, जो बहुत ही वाजिब है, को आसानी से सहन कर लेंगे।"
उन्होंने कहा, "यदि मंत्री समूह ऐसा फैसला नहीं लेता तो डीजल की बिक्री के कारण होने वाला नुकसान 23 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाता जिसे न तो सरकार और न ही तेल कंपनियां वहन कर पाती।"
उन्होंने कहा कि कीमतों में वृद्धि के बावजूद वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल के आधार पर तेल कंपनियों को करीब तीन हजार करोड़ रुपये का घाटा होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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