फेफड़े का कृत्रिम ऊतक चूहे में प्रत्यारोपित
वाशिंगटन, 25 जून (आईएएनएस)। वैज्ञानिकों ने कृत्रिम रूप से तैयार किए गए फेफड़े के ऊतक को चूहे में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया है। इससे मनुष्य के लिए पूरे फेफड़े को तैयार करने की उम्मीद बढ़ गई है।
अमेरिका में फेफड़े की बीमारी से प्रति वर्ष लगभग 400,000 मौतें होती हैं। फेफड़े के ऊतक को कृत्रिम रूप से तैयार करना कठिन है, क्योंकि सामान्य तौर पर माइक्रोस्कोपिक स्तर के आगे यह कृत्रिम रूप से तैयार नहीं हो पाता।
याले युनिवर्सिटी में एनेस्थिसियोलॉजी एवं बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर लौरा निकलसन ने कहा है, "हम चूहे में प्रत्यारोपण योग्य फेफड़े को तैयार करने में सफल हुए हैं, जो ऑक्सीजन और कॉर्बन डाईऑक्साइड का पर्याप्त रूप से आदान-प्रदान कर सकता है और रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन को ऑक्सीजनयुक्त कर सकता है।"
निकलसन ने कहा, "बड़े जीवों और मनुष्य के लिए पूरे फेफड़े के कृत्रिम निर्माण की दिशा में यह शुरुआती कदम है।"
फिलहाल पूर्ण विकसित फेफड़े के क्षतिग्रस्त ऊतक के मरम्मत का एक मात्र तरीका फेफड़ा प्रत्यारोपण ही है। लेकिन इस प्रक्रिया में अंग की अस्वीकृति और संक्रमण की संभावना अधिक होती है और मात्र 10 से 20 प्रतिशत मामलों में ही 10 वर्ष तक का जीवन मिल पाता है।
याले युनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का मकसद इस बात का पता लगाना है कि क्या प्रयोगशाला में ऊतक से तैयार किए गए फेफड़ों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया जा सकता है, जोकि फेफड़े की प्राथमिक क्रिया, ऑक्सीजन और कॉर्बन डाईऑक्साइड का आदान-प्रदान करने में सक्षम हो।
याले युनिवर्सिटी की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि अनुसंधानकर्ताओं के दल ने पाया है कि कृत्रिम फेफड़ों की यांत्रिक विशेषताएं मूल ऊतक जैसी ही है और प्रत्यारोपण के बाद वे ऑक्सीजन और कार्बन डाईऑक्साइड के आदान-प्रदान में सक्षम हैं।
यह निष्कर्ष 'साइंस एक्सप्रेस' के गुरुवार के अंक में प्रकाशित हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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