हुर्रियत का ‘कश्मीर छोड़ो’ आंदोलन

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारतीय कश्मीर के पृथक्तावादी संगठन सर्वदलीय हुर्रियत कॉंफ़रेन्स के गीलानी धड़े ने शुक्रवार से ‘कश्मीर छोड़ो’ आंदोलन शुरु करने की घोषणा की है.
हुर्रियत के एक प्रमुख नेता मसरत आलम ने एक प्रेस सम्मेलन को बताया कि अगले सप्ताहांत यानि शुक्रवार और शनिवार को पूरे राज्य में बंद रहेगा.
उन्होने कहा कि छात्रों और महिलाओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों के लोग इस आंदोलन में शामिल होंगे.
लोगों से कहा गया है कि वो रविवार को पूरे राज्य में जगह जगह ये नारा लिखें ‘निकलो भारत निकलो’. इस अभियान के दौरान निश्चित दिनों पर मस्जिदों में ख़ास नमाज़ भी होगी.
हुर्रियत के नेता ने लोगों से ज़रूरत का सामान ख़रीद कर रखने की सलाह दी है जिससे लगता है कि यह अभियान लम्बे समय तक चल सकता है.
उन्होने कहा, "हम जल्दी ही प्रतिरोध का एक व्यापक कार्यक्रम जारी करेंगे".
श्री आलम ने कहा कि वो विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों से भी इस आंदोलन में हिस्सा लेने को कहेंगे.
उन्होने नागरिक और पुलिस प्रशासन के ज़िला प्रमुखों को चेतावनी दी है कि वो ‘कश्मीर में भारतीय निरंकुशता का हथियार’ न बनें.
उन्होने इन अधिकारियों से कहा कि अगर वो उनकी बात नहीं मानेंगे तो आम कश्मीरियों से उनका सामाजिक बहिष्कार करने को कहा जाएगा.
हुर्रियत के नेता ने सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग की. उन्होने भारत सरकार को चेतावनी दी है कि अफ़ज़ल गुरु को फांसी न चढ़ाए.
अफ़ज़ल की पत्नी ने भारत के राष्ट्रपति से दया की अपील की है. लेकिन भारत सरकार पर दक्षिणपंथी भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से इस अपील को ख़ारिज करने का दबाव पड़ रहा है.












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