शहज़ाद ने अपने जुर्म क़बूल किए

मैनहटन की एक अदालत में अपना जुर्म क़बूल करते हुए शहज़ाद ने कहा कि वो 'अपना जुर्म सौ बार स्वीकार करते हैं.'शहज़ाद ने कहा कि वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं जिससे कि अमरीकियों को पता चल सके कि यदि वे अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ से हटते नहीं हैं तो उन पर और हमले हो सकते हैं.
चूंकि फ़ैसल शहज़ाद ने सारे अभियोग स्वीकार कर लिए हैं इसलिए अब अदालत में मुक़दमा नहीं चलेगा और अब अक्तूबर में पाँच तारीख़ को सज़ा सुनाई जाएगी.फ़ैसल शहज़ाद ने स्वीकार किया है कि मई महीने की पहली तारीख़, शनिवार जब टाइम्स स्क्वैयर की भीड़भरे इलाक़े में उन्होंने एक कार को पार्क किया था जिसमें बम रखा हुआ था.वहाँ एक दुकानदार ने कार के भीतर से धुँआ निकलता देखा तो पुलिस को इसकी सूचना दी.
पेट्रोल और प्रोपेन से बने इस बम में विस्फोट नहीं हो सका था. इस बम को बाद में निष्क्रिय कर दिया गया था.मैनहटन के संघीय ज़िला अदालत में जज मिरियम काडरबॉम ने फ़ैसल शहज़ाद से बहुत से सवाल पूछे जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी हैं.जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें यह समझ में आ रहा है कि उन्हें जीवन भर जेल में बिताना पड़ सकता है, तो उन्होंने कहा कि हाँ, उन्हें इसका ज्ञान है.
खचाखच भरी अदालत में फ़ैसल शहज़ाद ने कहा, "यह समझना होगा कि मैं कहाँ से आता हूँ और मैं अपने आपको इस्लाम का सैनिक समझता हूँ."अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से दिए गए दस्तावेज़ों में आरोप लगाया गया है कि शहज़ाद को विस्फोट करने की ट्रेनिंग और पैसा दोनों पाकिस्तान के तालेबान से मिला.
फ़ैसल शहज़ाद को घटना के दो दिनों बाद जेएफ़के हवाई अड्डे पर गिरफ़्तार किया गया था जहाँ से वे दुबई जाने की तैयारी में थे.बाद में अधिकारियों ने कहा था कि 30 वर्षीय शहज़ाद ने पूछताछ के दौरान पूरा सहयोग किया है.लेकिन इस घटना ने एक बात और ज़ाहिर की वह यह कि अमरीका को अब ख़तरा अपने भीतर ही है और अब उसे तय करना है कि वह इससे किस तरह से निपटेगा.












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