बांग्लादेश में फ़ुटबॉल की दीवानगी

विश्व स्तर पर फ़ुटबॉल में बांग्लादेश की रैंकिग 157वीं है लेकिन बावजूद इसके यहां के लोगों में फ़ुटबॉल का जुनून सिर चढ़कर बोलता है. इसमें बाधक बनने वाली चीज़ों को वे बिल्कुल ही बर्दाश्त नहीं करते. हाल में हुई घटना इस बात को साबित कर देती है.
हुआ यूं कि बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी के छात्रों ने मांग की कि उनकी कक्षाएं जल्दी ख़त्म कर दी जाएं ताकि वे विश्व कप फ़ुटबॉल को टीवी पर देख सकें. लेकिन कुछ वरिष्ठ छात्र चाहते थे कि कक्षाओं को जारी रखा जाए. इस बात को लेकर छात्रों के दो पक्षों में हुई मारपीट की घटना में कम से कम चार छात्र घायल हो गए.
इस घटना के बाद यूनिवर्सिटी को अनिश्चितकाल तक के लिए बंद कर दिया गया है.
यूनिवर्सिटी के पब्लिक रिलेशन ऑफ़िसर मुहम्मद शाह आलम ने कहा, "मारपीट की घटना के बाद की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने यूनिवर्सिटी को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का फ़ैसला लिया है."
झगड़े की शुरूआत
बताया जाता है कि इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के छात्र बीते शनिवार के दिन से ही छुट्टी चाहते थे ताकि फ़ुटबाल मैचों को देख सकें. जब कि यूनिवर्सिटी ने छुट्टी 28 जून से निर्धारित की थी. ये छात्र अपनी मांग के साथ कक्षाएं बंद कराने लगे. तीसरे वर्ष के छात्रों और फ़ाइनल ईयर के छात्रों के बीच टकराव शुरू हो गया.
सत्ताधारी अवामी लीग का समर्थन करने वाले छात्र लीग ने मामले को शांत कराने की कोशिश भी की. लेकिन वे इस कोशिश में सफल में नहीं हुए. स्थिति को बेक़ाबू होते देखकर अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया.
पहले भी ऐसी घटनाएं
अभी कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश की सरकार ने फ़ैक्टरी मालिकों से अनुरोध किया था कि वे हर रोज़ शाम को फ़ैक्टरी बंद रखें ताकि लोगों को टीवी पर फ़ुटबॉल मैच देखने के लिए बिजली की पर्याप्त आपूर्ति की जा सके.
फ़ुटबाल मैचों के दौरान रिहायशी इलाक़ों में बिजली आपूर्ति में बाधा आने पर भारी तोड़फोड़ की कई घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं.
ढाका के फ़ुटबॉल प्रेमी अर्जेंटीना और ब्राज़ील की टीमों के बड़े समर्थक हैं.
हज़ारों लोगों ने अपने घरों, कारखानों, कारों, बाज़ारों को इन टीमों के झंडों और रंगों से सजाया है.












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