'साक्षर भारत के लिए व्यापक अभियान की जरूरत'
उन्होंने कहा कि साक्षर भारत कार्यक्रम में असाक्षरों को पढ़ाने के लिए अस्थाई लर्निंग सेंटर के लिए चयनित स्वयं सेवी शिक्षकों को मानदेय दिया जाना चाहिए। इसके बिना राजस्थान जैसे विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों वाले प्रदेश में नि:शुल्क स्वयंसेवी शिक्षकों का उपलब्ध होना मुश्किल होगा।
मेघवाल शुक्रवार को अपरान्ह नई दिल्ली में आयोजित राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में बोल रहे थे। सम्मेलन की अध्यक्षता केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने की। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डी.पुरंदेश्वरी भी मौजूद थीं।
राजस्थान के उच्च शिक्षा मंत्री डॉं. जितेन्द्र सिंह, प्रमुख शिक्षा सचिव अशोक सम्पतराम, प्रमुख तकनीकी शिक्षा सचिव विपीन चन्द्र शर्मा भी बैठक में उपस्थित थे। बैठक में शिक्षा मंत्री मास्टर भवंरलाल मेघवाल ने बताया कि राजस्थान में ग्राम पंचायत स्तर पर लोक शिक्षा केन्द्रों की स्थापना के लिए जिलों में स्थानों का चयन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इन केन्द्रों पर दो प्रेरकों को लगाया जायेगा। ये प्रेरक दसवी पास पुरूष एवं महिलाएं होंगी।
मेघवाल ने बताया कि साक्षर भारत कार्यक्रम के लिए राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में शाषी परिषद का गठन किया गया है। इसी प्रकार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में निष्पादक समिति बनाई गई है। इसके अलावा जिला स्तर पर जिला प्रमुख की अध्यक्षता में जिला लोक शिक्षा समिति का गठन किया गया है एवं जिला कलेक्टर को जिला निष्पादक समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी प्रकार ब्लाक स्तर पर पंचायत समिति के प्रधान और ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम सरपंच की अध्यक्षता में लोक शिक्षा समितियों का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में करीब एक करोड़ परिवारों जिसमें लगभग पांच करोड़ व्यक्तियों का सर्वेक्षण कर असाक्षरों का पता लगाया जायेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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