कनिष्क पीड़ितों की जांच रिपोर्ट पर मिलीजुली प्रतिक्रिया
टोरंटो, 18 जून (आईएएनएस)। एयर इंडिया के कनिष्क विमान में 1985 में हुए विस्फोट के 25 साल बाद आई जांच रिपोर्ट पर पीड़ित परिवारों की राय मिलीजुली है।
पीड़ित परिवार इस बात से दुखी हैं कि शायद अब दोषियों को कभी सजा नहीं मिल पाएगी।
इन परिवारों की दबाव की वजह से कनाडाई सरकार ने न्यायधीश जॉन मेजर की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था। चार वर्ष तक चली जांच के दौरान आयोग ने पीड़ित परिवारों से बात करने के साथ जन सुनवाई करने के अलावा 200 से अधिक गवाहों के बयान लिए।
मेजर ने गुरुवार को अपनी जांच रिपोर्ट जारी कर दी। इसमें कनाडाई सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया है।
23 जून, 1985 को मांट्रियल से दिल्ली के लिए उड़े कनिष्क विमान को विस्फोट से उड़ा दिया गया था। विमान में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। उसी दिन टोक्यो हवाई अड्डे पर भी विस्फोट हुआ था जिसमें दो लोग मारे गए थे।
इस घटना के बाद बाल गुप्ता ने 'एयर इंडिया पीड़ित परिवार संघ' नामक एक संगठन का गठन किया था। इस विस्फोट में गुप्ता ने अपनी पत्नी को खो दिया था। रिपोर्ट जारी होने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर से मुलाकात की। यह मुलाकात 45 मिनट तक चली।
गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, "इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद हमारी जिंदगी का महज एक अध्याय खत्म हुआ है। उन आठ दंपत्तियों का क्या, जिन्होंने इस विस्फोट में अपने सभी बच्चों को गवां दिया? आज ये दंपत्ति अपने बच्चों के बगैर अंधेरे में जिदगी जी रहे हैं।"
पेशे से इंजीनियर गुप्ता वर्ष 1968 में कनाडा पहुंचे थे। उन्होंने कहा, "आज का दिन (गुरुवार) हमारे लिए मिलाजुला है। अच्छी बात यह है कि इस रिपोर्ट में हमारे संदेहों की पुष्टि हुई। परंतु दुख की बात यह है कि 20 साल से अधिक वक्त बहुत होता है।"
गुप्ता के साथ चर्चित कलाकार लता पाडा भी हार्पर से मिलने पहुंची थीं। इस घटना में अपने पति और दो बेटियों को खो देने वाली लता ने आईएएनएस से कहा, "इस रिपोर्ट में हमें थोड़ा इंसाफ जरूर मिला है लेकिन दुख इस बात का है कि दोषियों को अब कभी सजा नहीं होगी।"
उल्लेखनीय है कि इस मामले में दोषी करार दिए गए एकमात्र शख्स इंदरजीत सिंह रेयात को पिछले साल रिहा कर दिया गया था। वह 15 साल तक जेल में रहा। दो अन्य आरोपियों अजायब सिंह बागड़ी और रिपुदमन सिंह मलिक को निचली अदालत ने मार्च, 2005 में ही बरी कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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