जसवंत-उमा की वापसी से भाजपा में लौटेगी खुशी?
पार्टी की संसदीय बैठक में दोनों नेताओं के वापस आने की घोषणा हो सकती है। जसवंत के वापस लौटने के कयास उस दिन से ही लगने शुरू हो गए थे जिस दिन राजस्थान के प्रमुख नेता भैरोंसिंह शेखावत की अंतयोष्ठी पर आडवाणी और जसवंतसिंह की जुगलबंदी देखी गई थी। गौरतलब है कि जसवंत सिंह को 'जिन्ना—इंडिया, पार्टीशन इंडिपेंडेंस" किताब से उठे विवाद के कारण उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था।
पार्टी के नेताओं का कहना था कि जसवंतसिंह ने शेखावत के निधन पर जयपुर आने के लिए अलग से तैयारियां की थीं, लेकिन आडवाणी ने उन्हें फोन करके भाजपा के प्रमुख नेताओं के साथ जयपुर जाने का आग्रह किया। इसे दिल्ली और जयपुर में जसवंतसिंह की भाजपा में वापसी के संकेत के तौर पद देखा जा रहा था। भैरोंसिंह शेखावत ने भाजपा में रहते हुए कभी क्षत्रिय जाति का कार्ड नहीं खेला, जबकि वे राजपूत समाज के निर्माण कर्ता माने जाते हैं। वे भाजपा के ताकतवर नेताओं में रहे। शेखावत के जाने के बाद भाजपा के पास अब कोई दूसरा कद्दावर राजपूत नेता नहीं है, जो उनकी जगह ले सके।
साथ ही भाजपा से जुड़े कई राजपूत नेता पिछले तीन साल के दौरान भाजपा से अलग हो चुके हैं। राजपूत समाज इस वजह से भाजपा नेतृत्व से खफा भी है। ऐसे नेताओं में जसवंतसिंह, सुरेंद्रसिंह राठौड़, लोकेंद्र कालवी, अर्जुन सिंह देवड़ा आदि हैं। जसवंतसिंह की भाजपा में वापसी की एक बड़ी वजह राजस्थान के राजघरानों का पार्टी के प्रति मोहभंग भी है।
जानिए सिनेमा जगत को
खैर आपसी झगड़े की शिकार भाजपा का ये कदम दर्शाता है कि आज उसको अपने अनुभवशील नेताओं की जरूऱत आन पड़ी है ताकि अपने विषय और उद्देश्यों से भटकी भाजपा अपनी पुरानी रंगत पा सके। शायद जसवंत सरीखे योग्य नेता को वापस लाकर मुरझाया कमल फिर से खिल सके। खैर पार्टी के समीकरण जसवंत सिंह के पक्ष में हैं जिससे उम्मीद की जा रही है कि भाजपा अपने पुराने उसूलों को पा सकने में कामयाब होगी।













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