गस त्रासदी मामले में भाजपा से भी हुई भूल (लीड-1)
प्रदेश सरकार के गैस राहत मंत्री बाबू लाल गौर ने गैस पीड़ितों के लिए केंद्र सरकारों द्वारा गंभीर और ईमानदार पहल न किए जाने का आरोप लगाकर कांग्रेस के साथ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
गौर ने मंगलवार को भेापाल में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वर्ष 1999 के बाद से गैस पीड़ितों को किसी तरह की मदद नहीं मिली है। इसके लिए उन्होंने कई खत लिखे, मगर जरूरत के मुताबिक सहायता नहीं मिली। गौर से जब पूछा गया कि इस अवधि में कांग्रेस के साथ भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार भी रही है तो उन्होंने कहा कि इस अवधि में सभी को खत लिखे गए थे, चाहे प्रधानमंत्री कोई भी रहे हों।
गौर ने स्वीकारा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह भी उन्हें कई बार प्रधानमंत्री से मिलवाने दिल्ली लेकर गए हैं, उसके बावजूद केंद्र की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई।
केंद्र सरकार से गौर ने मांग की है कि एंडरसन मामले पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर करे, ताकि उसे उम्रकैद तक की सजा मिल सके।
गौर ने एक सवाल के जबाव में कहा कि 18 जून को वह दिल्ली में होने वाली मंत्रि समूह की बैठक में गैस पीड़ितों के लिए अब तक किए गए पत्र व्यवहार का हवाला देंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास 982 करोड़ की कार्ययोजना के अलावा यूनियन कार्बाइड कारखाना परिसर में स्मारक बनाने के लिए 116 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है जो लंबित है।
गैस पीड़ितों की समस्याओं को लेकर गौर ने मंत्री समूह के अध्यक्ष गृह मंत्री पी चिदंबरम को पत्र भी लिखा है। इस पत्र में उन्होंने भोपाल मेमोरियल अस्पताल ट्रस्ट के पुनर्गठन की जरूरत बताई है।
दूसरी ओर, पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रभात झा ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि गैस त्रासदी को समझने मे उनकी पार्टी से भी भूल हुई है। उन्होंने कहा, "हम बहुत दिनों तक इस त्रासदी के रूप को नहीं समझ पाए। पार्टी दो बार सत्ता में आई, मगर वह कोशिश नहीं हुई जिसकी पीड़ितों को जरूरत थी। इसके बावजूद प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरेासा दिलाया है कि पीड़ितों के आंसू पोंछने की हरसंभव कोशिश की जाएगी।"
उन्होंने कहा है कि अर्जुन सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में 1985 में डिजास्टर एक्ट बनाया गया था जिस वजह से सारी ताकतें केंद्र सरकार के पास पहुंच गया था। मामला कानूनी हो जाने के कारण वह पहल नहीं हो पाई जो होना चाहिए था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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