महंगाई दर दहाई में पहुंची, ब्याज दरों में हो सकती है वृद्धि (राउंडअप)
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में खाद्य पदार्थों की कीमतें पिछले साल के इसी महीने की कीमतों के मुकाबले 16.49 प्रतिशत बढ़ी जबकि अप्रैल में इनमें पिछले साल के मुकाबले 16.87 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, मई महीने में ईंधन की कीमतें 13.05 प्रतिशत बढ़ीं।
मई महीने में प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में 16.6 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई है, अप्रैल में इन वस्तुओं की महंगाई दर 13.88 प्रतिशत थी। प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में हुई इस तेज वृद्धि से विस्तृत क्षेत्रों में महंगाई बढ़ने का संकेत मिल रहा है। निर्माण उत्पादों की कीमतों में इस महीने में 6.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
इससे पहले खाद्य पदार्थों की महंगाई दर भी 29 मई को समाप्त हुए सप्ताह में बढ़कर 16.74 प्रतिशत हो गई है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष और रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन ने कहा, "मुझे लगता है कि स्थिति एकदम स्पष्ट है, महंगाई का दबाव काफी ज्यादा है। रिजर्व बैंक की ओर से कुछ नीतिगत कदम उठाए जा सकते हैं।"
वहीं दूसरी ओर सरकार ईंधन की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने के प्रयास कर रही है जिससे तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकेंगी। मौजूदा स्थिति सरकार के इस कदम से पेट्रोल डीजल की कीमतों में 3.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
पिछले सप्ताह इस मुद्दे पर निर्णय के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में मंत्रियों के आधिकारिक समूह की बैठक आयोजित की गई थी लेकिन कई मंत्रियों के अनुपस्थित रहने से फैसला टाल दिया गया था। इस समूह की अगली बैठक 17 जून को होनी है।
देश में महंगाई दर दोहरे अंकों में पहुंचने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने सोमवार को कहा है कि ईंधन की कीमतों को नियंत्रण मुक्त किया जाए, जिससे सरकार का राजकोषीय घाटा कम होने पर छह महीने में महंगाई घट जाएगी।
वित्त मंत्रालय को आर्थिक मामलों पर सलाह देने वाले बसु ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "मेरा मानना है कि ईंधन की कीमतों को नियंत्रण मुक्त किया जाना चाहिए, मुझे लगता है कुछ हद तक इन्हें नियंत्रण मुक्त किया जाना चाहिए है।"
लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त पूर्व व्याख्याता बसु ने कहा, "महंगाई के जो आंकड़े आप देख रहे हैं उनके छोटी अवधि में तो कुछ बढ़ोतरी हो सकती है लेकिन अगले छह महीनों में आप इसे घटता हुआ देखेंगे, आप देखेंगे कि सरकार का राजकोषीय घाटा कम होने से महंगाई दर में कमी आएगी।"
वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक महंगाई दर में लगातार बढ़ोतरी और व्यापक क्षेत्रों में महंगाई बढ़ने से केंद्रीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जुलाई में होने वाली मौद्रिक समीक्षा में या उससे पहले ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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