माता-पिता का ख्याल ना रखने पर हो सकती है जेल
मुख्यमंत्री कार्यालय में गुरुवार शाम राज्य कैबिनेट की बैठक में 'मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सीटीजन अधिनयम' के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
इस अधिनियम के तहत राज्य के सभी सब-डिविजनों में एक न्यायाधिकरण का गठन किया जाएगा। न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में सब-डिविजनल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया, "यह न्यायाधिकरण बच्चों या उनके आश्रितों को उनके माता-पिता को माहवारी भत्ता देने का निर्देश दे सकता है।"
ऐसे मामलों में अधिकतम 10 हजार रुपये की माहवारी भत्ते की घोषणा की जा सकती है।
यह अधिनियम उस समय लागू किया जाएगा जब बच्चे अपने माता-पिता की देखभाल करने से इंकार कर रहे हों या फिर उनकी उपेक्षा कर रहे हों। ऐसे मामलों में न्यायाधिकरण तीन महीने की जेल की सजा सुना सकती है या फिर जुर्माना लगा सकती है। इस जुर्माने को 5,000 रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।













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