हिमाचल में सेब की बंपर फसल की उम्मीद
शिमला, 9 जून (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में हाल के हफ्तों से हो रही लागातार बारिश सेब की फसल के लिए मददगार साबित हुई है और क्षेत्रों की रिपोर्ट के मुताबिक इस मौसम में उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।
बागवानी के निदेशक गुरुदेव सिंह ने कहा, "क्षेत्रों से मिल रहीं रिपोर्ट के मुताबिक इस समय सेब का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। यह निश्चित रूप से वर्ष 2008-09 के 510,000 टन उत्पादन से ऊपर जाएगा।"
राज्य में पिछले साल मानसून के दौरान बारिश न होने और सर्दी में बर्फबारी के अभाव में सेब के उत्पादन में 280,000 टन की गिरावट आई थी।
बागवनी विशेषज्ञों का कहना है कि सेब उत्पादन वाले क्षेत्रों मसलन शिमला, किन्नौर, मंडी और कुल्लू जिलों में पर्याप्त मात्रा में बारिश होने की वजह से मिट्टी में नमी बढ़ गई है। इससे पौधों को पोषण मिलने में मदद मिलेगी।
सोलन में स्थित 'वाई. एस. परमार युनिवसिर्टी ऑफ हॉर्टिकल्चर एण्ड फारेस्ट्री' के पूर्व संयुक्त निदेशक एस. पी. भारद्वाज ने आईएएनएस को बताया, "राज्य के सेब उत्पादन क्षेत्रों में पिछले कुछ हफ्तों में अच्छी मात्रा में बारिश हुई है। इससे फल उत्पादन की मात्रा में बढ़ोतरी होगी।"
शिमला के ऊपरी इलाकों में सेब के प्रमुख उत्पादनकर्ता गोपाल मेहता ने बताया, "सेब की फसल को गुलाबी हो जाने तक पर्याप्त बारिश की जरूरत होती है।"
मेहता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पिछले साल के नुकसान की इस वर्ष भरपाई हो जाएगी।
शिमला में मौसम केंद्र के मुताबिक मानसून आने से पहले ही पर्याप्त मात्रा में बारिश हो चुकी है।
भारद्वाज ने बताया कि कोठगढ़, शिमला के थानेदार और मंडी जिले व कुल्लू घाटी में सेब अखरोट के आकार का हो गया है। सेब का सही आकार 85 से 110 मिलीमीटर का होना चाहिए।
ऊंचाई वाले किन्नौर जिले की तरह ही पूह, चांगों और रिबा में हालांकि सेब अखरोट के आकर का अभी नहीं हुआ है। उच्च गुणवत्ता वाले सेब किन्नौर में होते हैं। इनके बाजार में पहुंचने तक और जगह की फसल खत्म हो चुकी होती है और इसका बाजार पर एकाधिकार होता है।
भारद्वाज ने बताया कि जुलाई के अंतिम हफ्ते तक सेब बाजार में आ जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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