मणिपुर में नाकेबंदी से खाद्य व दवा का संकट
इंफाल, 9 जून (आईएएनएस)। मणिपुर में जनजातीय संगठनों की अनिश्चितकालीन नाकेबंदी के बुधवार को 60 दिन पूरे गए। इस दौरान आवश्यक सामग्रियों की आवाजाही ठप्प है। राज्य में खाद्य सामग्री व दवाओं का संकट गहरा गया है।
मणिपुर सरकार के प्रवक्ता व सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एन.बीरेन सिंह ने आईएएनएस को बताया, "राज्य में खाद्य सामग्री में तो मामूली कमी आई है, लेकिन जीनव रक्षक दवाओं की भारी कमी हो गई है। नाकेबंदी के 60 दिन पूरे हो गए हैं और इसके जल्द खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।"
कई नागा संगठनों ने 11 अप्रैल से ही राष्ट्रीय राजमार्ग 39 जो राज्य की जीवनरेखा मानी जाती है, पर अनिश्चित काल के लिए नाकेबंदी कर दी है। उन्होंने नाकेबंदी अलगाववादी नेता थुइंगालेंग मुइवा को अपने जन्मस्थान पर जाने से राज्य सरकार द्वारा रोके जाने के विरोध में की है।
मणिपुर सरकार ने 75 वर्षीय नेता मुइवा के पैतृक गांव जाने पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि उनके जाने से दंगा फैल सकता है।
ज्ञात हो कि मणिपुर आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिए भारत के अन्य क्षेत्रों पर निर्भर है जो नागालैंड के रास्ते वहां पहुंचती है।
नाकेबंदी की वजह से राज्य में सामानों के दाम आसमान छूने लगे हैं। चावल जो पहले 20 से 24 रुपये किलो मिल रहा था, इन दिनों 70 रुपये किलो मिल रहा है। एक लिटर पेट्रोल 200 रुपये में और रसोई गैस सिलेंडर 1,000 से 1,200 रुपये में मिल रहा है।
मणिपुर सरकार ने कुछ सामानों की आपूर्ति हवाई जहाज के जरिये और करीब 500 ट्रक सामानों की आपूर्ति आसाम के रास्ते राष्ट्रीय राजमार्ग 53 से होते हुए सुरक्षाबलों की निगरानी में की है।
उल्लेखनीय छह मई को सरकार के प्रतिबंध के बावजूद अपने गांव का दौरा करने पर मुइवा के अड़े होने की वजह से पुलिस के साथ संघर्ष में छह नागा प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी और 70 घायल हो गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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