मानसून सत्र में पेश की जाएगी नई कर संहिता: मुखर्जी

बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "सभी पक्षों की आपत्तियां सुनने के बाद संशोधित प्रारूप तैयार किया जा रहा है।"

आयकर विभाग के प्रमुख आयुक्त और महानिदेशकों के सम्मेलन में बोलते हुए मुखर्जी ने कहा, "मानसून सत्र में संसद में प्रस्तावित किए जाने से पूर्व विचार पत्र को जनता के बीच विचार-विमर्श के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह विचार-पत्र 21 वीं सदी का ऐसा कानून बनेगा जो एक मजबूत और ओजपूर्ण भारत के उदय का गवाह बनेगा।"

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष कर सरकार के लिए राजस्व का महत्तवपूर्ण जरिया है। प्रत्यक्ष कर संग्रह में पिछले पांच साल से प्रतिवर्ष 24 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2004-05 में 1,32,771 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष कर संग्रह हुआ जो 2009-10 में बढ़कर 3,78,000 करोड़ रुपये हो गया।

सकल घरेलू उत्पाद(जीडीपी) में प्रत्यक्ष कर का हिस्सा 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 6.1 प्रतिशत हो गया है। सरकार कर संरचना को तर्कसंगत और आसान बनाने पर जोर दे रही है।

मुखर्जी ने कहा कि कर कानून को सरल, तर्कसंगत और स्थिर बनाए जाने की जरूरत है। करों की दर नियंत्रित होनी चाहिए। कर प्रणाली में छूट और राहतों की जटिलता दूर होनी चाहिए जिससे कर दायरे को विस्तृत बनाया जा सके।

उन्होंने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के कौशल में वृद्धि करने पर जोर देते हुए कहा कि इसी साल से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में अधिकारियों को जटिल अंतर्राष्ट्रीय सौदों, कर संग्रह में कमी लाने वाली योजनाओं से बचने के तरीकों, अधिकतम कर स्रोतों का उपयोग और कर क्षेत्राधिकार के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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