भारत और श्रीलंका के बीच 7 समझौतों पर हस्ताक्षर (लीड-1)
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के साथ विभिन्न मसलों पर व्यापक बातचीत की। उन्होंने विस्थापित तमिलों की तकलीफों के मसले पर भारतीय चिंताओं से अवगत कराया और दशकों पुरानी जातीय समस्या के राजनीतिक समाधान पर जोर दिया।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं ने आर्थिक संबंधों के विस्तार, विकास और आतंकवाद निरोधक गतिविधियों में सहयोग बढ़ाने सहित द्विपक्षीय और अंतर्राष्ट्रीय मसलों पर भी चर्चा की।
राजपक्षे ने सिंह को शरणार्थी शिविरों में रह रहे तमिलों के जल्द पुनर्वास की अपनी सरकार की योजना की जानकारी दी। उन्होंने सिंह को जातीय समस्या के राजनीतिक समाधान के लिए सहमति बनाने के अपनी सरकार के प्रयासों की जानकारी दी।
बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों पक्षों ने सुरक्षा, ऊर्जा, रेलवे और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
दोनों देशों के बीच आपस में जुड़े हुए बिजली के ग्रिड की स्थापना के बारे में भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। इस ग्रिड से 1000 मेगावाट बिजली की आपूर्ति होगी, जिससे बिजली की किल्लत से जूझ रहे श्रीलंका को राहत मिलेगी। दोनों देशों के ग्रिड को समुद्र तल में केबल बिछाकर जोड़ा जाएगा।
सजायाफ्ता लोगों को एक-दूसरे के यहां भेजने और आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता के लिए दो सहमति पत्रों पर दस्तखत हुए।
तलायमन्नार-मधु रेल संपर्क से जुड़े एक समझौते पर भी दस्तखत हुए।
राजपक्षे की भारत की राजकीय यात्रा राष्ट्रपति भवन में रस्मी स्वागत से शुरू हुई। विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने राजपक्षे से भेंटकर संघर्ष में विस्थापित हुए करीब 300,000 तमिलों के पुनर्वास और तमिल तथा मुस्लिम अल्पसंख्यकों के राजनीतिक पुनर्वास से जुड़े मसलों पर चर्चा की।
राजपक्षे चार दिन की भारत यात्रा पर मंगलवार शाम को यहां पहुंचे। जनवरी में राष्ट्रपति पद पर दोबारा निर्वाचित होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है।
श्रीलंका में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे)का सफाया हो जाने के एक साल बाद भी करीब 80,000 विस्थापित तमिल राहत शिविरों में ही रह रहे हैं।
श्रीलंका सरकार ने लिट्टे के खात्मे के बाद छह महीने के भीतर सभी तीन लाख तमिल विस्थापितों के पुनर्वास का वादा किया था लेकिन अब उसने अगस्त तक राहत शिविरों को बंद करने की समय सीमा तय की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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