‘खाताधारकों का विवरण नहीं’

स्विटज़रलैंड की संसद ने अमरीका के साथ उस समझौते को नामंज़ूर कर दिया है जिसमें हज़ारों अमरीकी ग्राहकों के यूबीएस नामक बैंक में खातों के बारे में जानकारी अमरीकी कर अधिकारियों को दी जानीं थी.
ये समझौता पहली बार अमरीका और स्विटज़रलैंड के बीच गत वर्ष अगस्त में हुआ था. तब यूबीएस के कुछ अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि उनके मैनेजरों ने कुछ खाता धारकों को कर से बचने में सहायता की थी.
लेकिन उसके बाद स्विटज़रलैंड की सबसे बड़ी अदालत ने इस समझौते के ग़ैर-क़ानूनी क़रार देते हुए इसे संसद के पास भेज दिया था.
मंगलवार को स्विटज़रलैंड की संसद में लंबी चली एक बहस के बाद इस समझौते को ख़ारिज कर दिया. कुछ लोगों का मानना था कि सरकार को ऐसे किसी समझौते पर सहमत ही नहीं होना चाहिए था.
हज़ारों खाताधारकों के विवरण को अमरीकी अधिकारियों को देना स्विटज़रलैंड की परंपरागत गुप्त बैंकिंग प्रणाली को ख़त्म करने वाले क़दम के तौर पर देखा जा रहा था.
मंगलवार को संसद में दक्षिणपंथी और वामपंथी सदस्यों के असाधारण सहयोग ने इस समझौते को ख़ारिज कर दिया.
अब ये समझौता स्विटरज़रलैंड की सीनेट में जाएगा और आख़िर में इसपर राष्ट्रव्यापी जनमत संग्रह भी करवाया जा सकता है.
भारत में भी ये मुद्दा काफ़ी संवदेनशील रहा है और कुछ राजनीतिक पार्टियां स्विटज़रलैंड के बैंकों में गुप्त भारतीय खातों की जानकारी मांगने की बात कहती रहीं हैं.












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