कड़ी मशक्कत के बाद माना हेडली: अमेरिका
वाशिंगटन। लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य डेविड कोलमैन हेडली से भारत द्वारा पूछताछ के मामले पर उसने राजी करने में अमेरिका को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अमेरिका द्वारा बड़ी जद्दोजहद के बाद हेडली मुंबई हमले भारतीय अधिकारियों के सामने मुंह खोलने को राजी हुआ है। यह बात अमेरिका भी मानता है कि हेडली को राजी करने में उसे काफी समय लगा।
अमेरिका के दक्षिण एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लैक ने सोमवार को कहा, "मेरा मानना है कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। हम यह सुनिश्चित कर लेना चाहते थे कि हेडली मुंह खोलने के लिए राजी हो जाए। इसके साथ ही कई और चीजें निपटानी थीं।" भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के चार सदस्यीय दल को पिछले दिनों लश्कर-ए-तैयबा के इस संदिग्ध आतंकवादी हेडली से पूछताछ की इजाजत मिली थी। हेडली ने मुंबई हमले में अपनी संलिप्तता को शिकागो की एक अदालत में पहले ही स्वीकार कर चुका है।
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ब्लैक ने इस बात को खारिज कर दिया कि हेडली मामले से पिछले सप्ताह संपन्न भारत-अमेरिका सामरिक वार्ता पर कोई असर पड़ा। उन्होंने कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि इस कारण सामरिक वार्ता में किसी तरह की बाधा पैदा नहीं हुई। यह मामला तो सामरिक वार्ता के दौरान उठा भी नहीं।"
उन्होंने कहा, "वास्तव में हेडली के मामले पर दोनों देशों के बीच सामरिक वार्ता में चर्चा नहीं की गई। यह हमारी बातचीत का हिस्सा नहीं था।" हेडली मसले पर दोनों देशों के बीच पारदर्शिता की कमी से इंकार करते हुए ब्लैक ने कहा, "मैं यह कहना चाहता हूं कि दोनों सरकारों के बीच बेहद पारदर्शी और निकट सहयोग रहा है। कानूनी वजहों से कई ऐसी बातें हैं जिन्हें मीडिया के सामने नहीं कहा जा सकता। मेरा मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर अच्छा और निकट सहयोग है। हमारे भारतीय साथी भी यही राय रखेंगे।"












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