कारगिल युद्ध पर आदेश का अध्ययन कर रही है सेना

नई दल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। भारतीय सेना सैन्य बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के आदेश का विश्लेषण कर रही है जिसमें 1999 में हुए कारगिल युद्ध के अभिलेखों को संशोधित करने के लिए कहा गया है। एक अधिकारी ने पक्षपात का आरोप लगाकर अपील दायर की थी जिसके बाद न्यायाधिकरण ने यह फैसला दिया।

एक जानकार सूत्र ने आईएएनएस को बताया कि सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के साथ 29 मई को इस मामले पर चर्चा की। इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की संभावना पर भी चर्चा की गई।

सूत्र ने बताया, "फिलहाल निर्णय लिया गया है कि अपील पर विचार करने से पहले आदेश का गंभीरता से अध्ययन किया जाए और संबंधित अभिलेखों का विश्लेषण किया जाए।"

न्यायाधिकरण ने 26 मई को जारी आदेश में कहा कि युद्ध के दौरान श्रीनगर स्थित 15वीं बटालियन की कमान संभाल रहे पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण पाल ने 70वें पैदल सेना ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर देवेंद्र सिंह के साथ पक्षपात किया था।

नयायाधिकरण ने सेना को कहा है कि वह अभिलेखों की पड़ताल करे और कारगिल के बटालिक क्षेत्र में विजय का श्रेय सिंह को दे।

अपने फैसले में न्यायाधिकरण ने कहा है कि युद्ध के इतिहास को दर्ज करने के दौरान पाल ने अधीनस्थ सैन्य अधिकारी के साहसिक कार्यो की अनदेखी की है।

सिंह ने शिकायत की थी कि उनके कार्यो को नजरअंदाज किया गया, जिस कारण उन्हें युद्ध में वीरता पदक व मेजर जनरल के पद पर पदोन्नति से वंचित रहना पड़ा।

सिंह ने दावा किया था कि उन्हें महावीर चक्र मिलना चाहिए था, लेकिन उसके बदले विशिष्ट सेवा पदक मिला जो शांति के दौर का सम्मान है।

सूत्र के मुताबिक सेना अब युद्धकालीन रिपोर्टों की जांच कर रही है, ताकि न्यायाधिकरण के आदेश के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सके।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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